12 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म का मुकदमा 15 जून को खुर्जा नगर में दर्ज हुआ, जब यह बात उजागर हुई तो बच्ची करीब 24 सप्ताह की गर्भवती थी। जिला प्रशासन से अनुरोध पर उसके गर्भावस्था की जांच 30 जून को हुई। उस समय वह 24 सप्ताह 2 दिन की गर्भवती बताई गई।
बुलंदशहर के खुर्जा क्षेत्र की बोलने-सुनने में असमर्थ 12 वर्षीय गर्भवती की शारीरिक क्षमता गर्भपात के योग्य है। हालांकि गर्भपात के दौरान कुछ परेशानियां हो सकती हैं। मगर जेएन मेडिकल कॉलेज के बोर्ड ने गर्भपात की सहमति दी है।
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इस आधार पर हाईकोर्ट ने बुधवार को बालिका का गर्भपात बृहस्पतिवार को जेएन मेडिकल कॉलेज में नि:शुल्क कराने के आदेश दिए हैं। उसके बाद सभी स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं भी देने के आदेश दिए हैं। डीएम बुलंदशहर व मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य को तीन दिन में रिपोर्ट हाईकोर्ट में देने के लिए कहा है। अगली सुनवाई के लिए 17 जुलाई तारीख नियत की है।
12 वर्षीय बालिका से दुष्कर्म का मुकदमा 15 जून को खुर्जा नगर में दर्ज हुआ, जब यह बात उजागर हुई तो बच्ची करीब 24 सप्ताह की गर्भवती थी। जिला प्रशासन से अनुरोध पर उसके गर्भावस्था की जांच 30 जून को हुई। उस समय वह 24 सप्ताह 2 दिन की गर्भवती बताई गई। बाद में परिवार की ओर से बच्ची की शारीरिक दिव्यांगता व अन्य बीमारियों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट में गर्भपात कराने संबंधी अनुमति अर्जी दायर की।
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चूंकि, कानून के अनुसार, 24 सप्ताह से अधिक का गर्भपात नहीं कराया जा सकता। मगर गर्भवती की अनुमति भी जरूरी है। परिवार की इस अर्जी पर हाईकोर्ट ने एएमयू के कुलपति व बुलंदशहर डीएम को आदेश दिया था कि वह जेएन मेडिकल कॉलेज में पैनल से बालिका की शारीरिक अवस्था, स्वास्थ्य आदि की जांच कराएं। इसी क्रम में मंगलवार को जेएन मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के पैनल ने मेडिकल परीक्षण किया। आदेश के क्रम में बुधवार को मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश की गई।
हाईकोर्ट में पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राघव अरोरा के अनुसार, मामले में यह आदेश दिया गया है कि किशोरी 25 सप्ताह की गर्भवती है। उसका गर्भपात जेएन मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूती रोग विभाग की अध्यक्ष की निगरानी में विषय विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल से कराया जाए। प्रधानाचार्य नि:शुल्क इसकी व्यवस्था करेंगे और गर्भपात के बाद अगर किसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कत होती है तो उसके उपचार व देखरेख आदि की व्यवस्था की जाएगी। जरूरत पर खून चढ़ाया जाए। जरूरत पर अगर ऑपरेशन हो तो उसकी भी व्यवस्था की जाए। डीएम बुलंदशहर को आदेश दिया है कि वे गर्भपात के लिए बृहस्पतिवार सुबह दस बजे बालिका को मेडिकल कॉलेज में भिजवाने की व्यवस्था करेंगे। मेडिकल कॉलेज तीन दिन में पूरी रिपोर्ट देगा।
मेडिकल बोर्ड ने ये माना
अधिवक्ता राघव अरोरा के अनुसार, एएमयू के अधिवक्ता ने पहले बिना फार्म डी के यह रिपोर्ट पेश की थी। मगर अदालत ने उसे नियमानुसार फार्म डी में मंगवाया। इस रिपोर्ट का उन्होंने अवलोकन किया, जिसमें उल्लेखित है कि गर्भपात कराया जा सकता है। हालांकि इसके खतरे हैं। मगर उन्हें नजरंदाज किया जा सकता है। इसके चलते स्वास्थ्य पर शारीरिक व मानसिक असर हो सकता है। गर्भपात के लिए इस बच्ची का स्वास्थ्य योग्य है। खून की कमी हो सकती है, जिसे चढ़ाकर पूरा किया जा सकता है। सर्जिकल की जरूरत पड़ सकती है। बताया गया कि गर्भ रखने पर दिक्कतें ज्यादा हो सकती हैं। बोर्ड ने गर्भ रखने पर सहमति नहीं दी है। इस दौरान अदालत ने बालिका की मां को भी बुलाया। उनसे सहमति ली गई।