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...लोगों को हंसा दो तो इबादत हो जाती है

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ज्ञान महाविद्यालय के सरस्वती भवन में शिक्षक दिवस, महाविद्यालय के रजत जयंती वर्ष पर शिक्षक सम्मान व काव्य सम्मेलन का आयोजन किया गया।
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सम्मेलन में केके राजस्थानी ने हास्य रस की कविता सुनाकर श्रोताओं को तालियां बजाने के लिए मजबूर किया। कवयित्री मंजू शाक्य ने सुनाया ‘ सितारे जब करे झिलमिलाए जन्म लेती है तब कविता’। कवि पीके आजाद ने पढ़ा ‘कभी मैं तंग उससे कभी वो तंग मुझसे, चलो बाहर कोरोना है घर में जंग होती है’। कवयित्री बलजीत कौर तन्हा ने सुनाया ‘किसी को चाह लो तो चाहत हो जाती है लोगों को हंसा दो तो इबादत हो जाती है’। सबरस मुरसानी ने सुनाया ‘मनुहारो पर धन फूंक दिया जुल्फों में खुद को फंसाया है’। संचालन डॉ. रसिक गुप्ता ने किया। इस अवसर पर सारथी परिवार मथुरा, वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति मथुरा, इंटरनेशनल गुडविल सोसाइटी ऑफ इंडिया के पदाधिकारी व सदस्य, चेयरमैन दीपक गोयल, प्रबंधक मनोज यादव आदि मौजूद रहे। संचालन डॉ. ललित उपाध्याय व डॉ. नीलम सिंह ने किया। अध्यक्षता पूर्व मंडलायुक्त डॉ. आरके भटनागर, पूर्व कुलपति प्रो. केसी सिंघल, जिला विकास अधिकारी भरत कुमार मिश्र आदि मौजूद रहे। ब्यूरो
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