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कुर्बानियां शहीदों की रखना नजर में तुम...

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अमर उजाला कार्यालय में आयोजित कवि सम्मेलन एवं मुशायरा में शामिल कवि। - फोटो : CITY OFFICE
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अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले आजादी के अमृत महोत्सव के तहत तालानगरी स्थित कार्यालय में कवि सम्मेलन व मुशायरा का आयोजन किया गया। शायर जॉनी फॉस्टर, शायरा रेहाना शाहीन, कवि अशोक अंजुम, ओज के कवि हरीश बेताब, शायर नसीम नूरी कवयित्री डॉ. मंजू वनिता व शायर नसीर नादान ने अपनी रचनाओं से स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की शौर्यगाथा गायन के साथ काव्य के इंद्रधनुषी रंग बिखेरे।
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शुक्रवार को कवि सम्मेलन व मुशायरा की अध्यक्षता कर रहे शायर, गीतकार जॉनी फॉस्टर ने देश भक्ति का जोश यूं भरा-दूर अपने वतन से कहां जाओगे हूक जब भी उठेगी खिंचे आओगे, करो याद रागी का शबद सुनाना, शहर के वो गिरजे का सब को बुलाना, वो मस्जिद से उठती सुरीली अजान, वो पंडित के माथे के टीके की शान, वो सुबह-ए-बनारस वो लखनऊ की शाम, ये नानक ये चिश्ती ये बदरी का धाम, लाख दुनिया की दौलत लुटा दो मगर सौंधी मिट्टी की खुशबू कहां पाओगे।
मशहूर शायरा रेहाना शाहीन ने शहीदों की शहादत पर पढ़ा- कुर्बानियां शहीदों की रखना नजर में तुम, दुश्मन की फौज मुल्क से जब तक हटा न दो, तुमको कसम है जंग से वापस न लौटना, जब तक के मां के दूध की कीमत चुका न दो।
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कवि अशोक अंजुम ने सुनाया- दीन के, ईमान के होकर रहो, राम के, रहमान के होकर रहो, किंतु पहले ध्यान ‘अंजुम’ ये रहे, आप हिंदुस्तान के होकर रहो।
संचालन कर रहे ओज के कवि हरीश बेताब ने सुनाया- जो भारत पर हंसते-हंसते अपनी जान लुटाता है, नाम शहीदों की सूची में अपना वही लिखाता है, देश तुम्हारा ऋणी रहेगा, तुम मिसाल बन जाओगो, जिस दिन अपना झंडा पाकिस्तान पे तुम फहराओगे।
शायर नसीम नूरी ने सुनाया-जो किसी ने पूछा कभी कहीं के तेरा क्या है हासिले जिंदगी, तेरा नाम मुंह से निकल गया मेरी और कोई खता नहीं, तू कली है बाग-ए-निशात की, तुझे देखना भी नमाज है, मुझे इल्म है कि ‘नसीम’ ने तेरा पाक जिस्म छुआ नहीं।
कवयित्री डॉ. मंजू वनिता ने भारत का मान बढ़ाते हुए पढ़ा- सूरज प्रणाम करता जिसको षड् ऋतुएं करती अभिनंदन, यश दसों दिशाओं में मुखरित जिसकी पावन माटी चंदन, भारत भूमि तेरा वंदन, भारत भूमि तेरा वंदन, अब वो दिन दूर नहीं जब भारत विश्व गुरु बन जाएगा।
शायर नसीर नादान ने पढ़ा- ये सिर्फ तिरंगा नहीं दोस्तों, शान है हिंदुस्तान की, इसकी खातिर कब वीरों ने परवाह की जान की, अब हम सबकी जिम्मेदारी है इसके सम्मान की, आओ हम सब मिलकर बोले जय हो हिंदुस्तान की। अंत में रचनाकारों को स्मृति चिह्न भेंट करके सम्मानित किया गया।
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