सर्दियों में शॉल का नाम लेते ही जेहन में सबसे पहले जो नाम आता है वो है कश्मीरी शॉल का। कश्मीरी शॉल की कलाकारी के कद्रदान देश और दुनिया में कम नहीं है। कश्मीर की पश्मीना शॉल दिखने में जितनी खूबसूरत होती है उतनी ही गर्म भी होती है। पतली सी शॉल ठंड में जादू का काम करती है। कश्मीरी कलमकारी और फूलकारी की ये शॉल नुमाइश में आने वाले दर्शकों को अपनी ओर खींचने का काम कर रही हैं।
राजकीय कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी में कृष्णांजलि के बाहर सजे कश्मीरी बाजार में श्रीनगर से पांचवीं पीढ़ी के रूप में पहुंचे शरद खोड़ा ने बताया कि करीब 75 साल से अलीगढ़ की नुमाइश में दादा- पुरखे आ रहे हैं। अलीगढ़ वासियों का प्यार ही है कि इस सिलसिले को वे कायम रखे हुए हैं। वे खुद भी सात साल से यहां आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सर्दियों के मौसम में पश्मीना गर्म शॉल का इस्तेमाल सिर्फ ठंड भगाने के लिए ही नहीं, बल्कि स्टाइल दिखाने के लिए भी किया जाता है। लंबा-चौड़ा यह शॉल न सिर्फ लड़के और लड़कियों दोनों को ही पसंद आता है।
उन्होंने बताया कि शॉल, स्टोन, कश्मीरी फैरन, गर्म शूट, कुर्ती, एंब्रोडरी गाउन, कोट, क्रेप, सिल्क की साडियां खूब भा रही है। उन्होंने बताया कि 1200 रुपये से लेकर 30 हजार रुपये कीमत की शॉल की अच्छी मांग है। उन्होंने बताया कि अभी नुमाइश की शुरूआत हुई है।
जैसे-जैसे नुमाइश आगे बढ़ेगी ग्राहकों की संख्या भी बढ़ेगी। कोरोना के बाद इस बार उम्मीद है कि नुमाइश में अच्छी बिक्री होगी। उन्होंने बताया कि कश्मीर से करीब आठ-दस दुकानदार हर साल नुमाइश में आते हैं।