कारगिल की चोटी पर पाकिस्तानी घुसपैठियों को धूल चटाकर भारत का तिरंगा लहराकर फतह करने वाले रणबांकुरों में अलीगढ़ के भी जवान शामिल थे । यहां की माटी ने अपने तीन बहादुर जवानों को न्यौछावर कर दिया था । कारगिल की चोटी से दुश्मनों का पता लगाने वालों में अलीगढ़ के नरेश सिंह भी थे। सौरभ कालिया के साथ नरेश सबसे पहले कारगिल चोटी पर पहुंचे थे। दुश्मन से मुकाबला करते हुए वह शहीद हो गए । अतरौली के राजगांव के राजवीर की भी कहानी प्रेरणा से भरी हुई है। गोरई के गांव वास खेमा गांव के प्रेमपाल सिंह ने रणभूमि में अपने प्राण न्यौछावर कर देश की रक्षा की और अलीगढ़ की पावन माटी को धन्य किया था।
नरेश में थी बचपन से देश भक्ति की भावना
इगलास तहसील के ब्लॉक गौंडा क्षेत्र के छोटी बल्लभ के नरेश सिंह 18 फरवरी 1992 को इंटर की पढ़ाई करने के बाद सेना में भर्ती हुए थे । 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान नरेश सिंह अपने साथी सौरभ कालिया समेत पांच जवानों के साथ सबसे पहले कारगिल की चोटी पर चढ़े थे। तभी उन्हें पता चला कि पाकिस्तानी सैनिकों ने कारगिल चोटी पर घुसपैठ कर ली है। सामने दुश्मनों की पूरी टुकड़ी थी। ये सिर्फ पांच थे। संख्या में कम होने पर भी उन्होंने पाक सैनिकों को ललकारा । कुछ ही देर में पाक सैनिकों ने पांचों को अपने कब्जे में ले लिया। दुश्मनों ने उनके शरीर को अंग-भंग कर दिया। नरेश का शव करीब एक माह बाद मिला था। नरेश के पिता राजेंद्र सिंह, मां रूपवती देवी आज भी मानती हैं कि उनका बेटा सीमा पर देश की रक्षा कर रहा है । पत्नी कल्पना समेत पूरे परिवार को शहादत पर गर्व है।
मां के लिए तो आज भी जिंदा है बेटा प्रेमपाल
इगलास तहसील के गोरई के गांव वास खेमा के प्रेमपाल सिंह की बहादुरी पर आज भी पूरा गांव गर्व कर रहा है। 12वीं की पढ़ाई के बाद प्रेमपाल सेना में भर्ती हो गए। पिता शिव सिंह और मां वीरमती देवी उस समय बेटे की शादी की तैयारी कर रही थीं। तभी कारगिल में युद्ध छिड़ गया। युद्ध में वह बहादुरी से लड़ते हुए शहीद हो गए। बेटा के शव को देखकर मां का बुरा हाल था । उन्होंने सीने पर पत्थर रखकर उस समय कहा भी, मुझे गर्व है बेटा तूने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए । 1999 से आज भी प्रेमपाल की मां वीरमती अपने बेटे की प्रतिमा के पास भोजन रखती हैं और बिस्तर भी लगातीं हैं। वीरमती कहतीं हैं कि देश पर मर मिटने वाले कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होते हैं। मेरा बेटा शहीद हुआ है आज भी वो मेरे आसपास ही है।
राजवीर की शहादत पर है गर्व
तहसील अतरौली के राजगांव के जाट रेजीमेंट में तैनात सूबेदार राजवीर सिंह ने कारगिल में युद्ध के समय दुश्मनों से लोहा लेते हुए अपने साथी की जान बचाने के प्रसास में अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। राजवीर की शहादत को लेकर आज भी गांववासियों को नाज है। राजवीर से प्रेरणा लेकर गांव के कई युवा सेना में जाने की तैयारी कर रहे हैं।
शहीद परिवारों को नहीं मिला सरकारी योजनाओं का लाभ
26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस को 23 साल हो रहे हैं । सरकार की ओर से शहादत के बाद परिवार वालों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने की बात कही गई थी। मगर, प्रशासनिक लापरवाही से शहीदों के परिजनों को जमीन और शहीद मार्ग बनाने जैसे वादे अब तक अधूरे हैं। शहीद प्रेमपाल की मां वीरमती देवी ने बताया कि उनको गैस एजेंसी मिलनी थी। कुछ पैसा भी मिलने की बात आई। मगर, वह मिला या नहीं, यह नहीं पता। सरकार ने गांव में जमीन दी थी। अब उस जमीन पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है। छोटी बल्लभ के शहीद नरेश सिंह की पत्नी कल्पना बताती हैं कि पति की शहादत के बाद उनको मदद के तौर पर पेट्रोल पंप मिला। गांव के एक मार्ग का नाम उनके नाम पर भी रखा गया। सरकारी अधिकारियों ने कहा था कि उनको 20 बीघा जमीन दी जाएगी । मगर, यह वादा आज भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि अगर यह जमीन मिल जाए तो पति के नाम पर पार्क बनाएंगी। अतरौली के गांव राजगांव के राजवीर सिंह की पत्नी रामवती देवी बताती हैं कि दो बेटे दिनेश और लोकेश की परवरिश के लिए सरकार ने पेट्रोल पंप दिया था । गांव में शहीद स्थल बना दिया । इसी वक्त शहीद पति के नाम पर गांव के मार्ग का नाम परिवर्तित करने, गांव में पति के नाम सरकारी अस्पताल और कन्या इंटर कॉलेज खोलने की मांग की गई थी। मगर, सरकार ने इस मांग को आज तक पूरा नहीं किया है।
गिरासू हाल में है शहीद का स्मारक स्थल
26 जुलाई को पूरा देश कारगिल विजय दिवस की खुशियां मना रहा होगा। राजगांव में बना शहीद स्मारक स्थल पानी भरने से गिरासू हाल में जा पहुंचा है । शहीद के परिजनों ने कई बार नाली बनाने की मांग की, मगर कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। सूबेदार राजवीर सिंह जाट रेजीमेंट में थे। गांव में उनका स्मारक स्थल बना हुआ है। इसके पीछे ग्राम पंचायत से अमृत सरोवर का निर्माण हो रहा है। इस तालाब में गांव का खारिज पानी जाता है। शहीद की पत्नी रामवती देवी कहती हैं कि घुटनों तक पानी पोखर में गिरने से पहले ही स्मारक स्थल के बराबर दीवार के सहारे भरा रहता है। इससे दीवार कभी भी गिर सकती है । दीवार के सहारे सड़क से तालाब तक नाली बनाने को परिजनों ने कई बार कहा लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई । पिता नाहर सिंह के नाम से गांव में नलकूप का कनेक्शन है। नलकूप पर लगा ट्रांसफार्मर एक माह से फुका पड़ा है उसे बदलवाने के लिए बिजली अफसरों के यहां चक्कर काट रहे हैं। उसे बदला नहीं जा सका है। इससे धान की फसल सूख रही है।
शहीद प्रेमपाल सिंह - फोटो : CITY OFFICE
कारगिल में शहीद नरेश कुमार का फोटो लेकर बैठी पत्नी कल्पना।- फोटो : CITY OFFICE