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Aligarh News: वर्चस्व और प्रधानी छिनने के डर में हुई थी जगधीर की हत्या

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जगधीर सिंह बघेल का फाइल फोटो।
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गभाना के गांव चांदनेर के पूर्व प्रधान जगधीर की हत्या के बाद जिले की राजनीति अचानक गरमा गई थी। बरौली के दो राजनीतिक दिग्गज इस हत्या के बाद आमने-सामने आ गए थे। उस समय के पूर्व विधायक ठा.जयवीर सिंह ने तो तत्कालीन विधायक ठा.दलवीर सिंह के संरक्षण प्राप्त अपराधियों पर हत्या का आरोप लगा दिया था। वहीं हत्या में बंटी बिसारा का नाम आने के बाद पुलिस ने भी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर जांच की थी और उजागर हुआ था कि राजनीतिक वर्चस्व व प्रधानी छिनने के डर से यह हत्या हुई थी।
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ये था जगधीर व तत्कालीन प्रधान में विवाद
महेंद्र सिंह बघेल के चार पुत्रों में से जगधीर सिंह बघेल सबसे बड़े थे। उनसे छोटे तेजवीर सिंह बिजली विभाग में जेई के पद पर व मनोज दिल्ली में प्राईवेट कंपनी में एवं सबसे छोटा भाई हरिओम पैतृक खेतीबाड़ी संभालता है। जगधीर सिंह के पास चार बेटियां हैं। 42 वर्ष के पूर्व प्रधान जगधीर सिंह उस समय बसपा में सक्रिय पूर्व मंत्री जयवीर सिंह के बेहद करीबी थे। वह गांव में लगातार दो बार से प्रधान थे। 2015-16 में तीसरे चुनाव को वह सुरेश से मात्र 4 मतों से हारे थे।
इस पर उन्होंने मतगणना में धांधली का आरोप लगाते हुए एसडीएम कोर्ट में पिटीशन दायर किया था। जिसमें नौ मार्च 2016 को हुई सुनवाई के बाद एसडीएम कोर्ट में हुई पुर्नमतगणना में जगधीर सिंह बघेल को सात वोटों से विजयी घोषित कर दिया गया था। इस पर दलवीर सिंह स्तर से शिकायत के बाद एसडीएम ने अपने ही आदेश पर स्टे घोषित कर दिया था और सुरेश प्रधान बन गए थे। इसके बाद एसडीएम के आदेश के खिलाफ जगधीर हाईकोर्ट चले गए थे। सुरेश को लगने लगा था कि उसकी प्रधानी चली जाएगी। इस विवाद को ध्यान में रखते हुए पुलिस स्तर से दोनों पक्षों को पाबंद भी किया गया था।
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राशन डीलर चुनाव ने इस विवाद को दिया तूल
इसी क्रम में गांव में राशन डीलर के पद को लेकर घमासान चला आ रहा था। इसी विवाद में घटना वाले दिन राशन डीलर का चुनाव होना था। जगधीर वर्तमान डीलर पूरन के पक्ष में लामबंदी कर रह थे। तीन दिन से गांव में ही रुके हुए थे। घटना वाले दिन 11 बजे मतदान होना था। उससे पहले गांव में संपर्क के दौरान यह हत्या हुई थी।



हत्या के बाद प्रधान के घर पर ग्रामीणों का धावा
पूर्व प्रधान अलीगढ़ के कपिल विहार कालोनी में रहकर प्रॉपटी डीलिंग का काम करते थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार घटना के समय थानपुर की ओर से काले रंग की एक पल्सर व दूसरी सीडी डॉन बाइक पर सवार पांच बदमाश आए और और पूर्व प्रधान पर फायरिंग कर दी। वहां खड़े लोगों ने बदमाशों का रास्ता रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने उन पर भी हवाई फायरिंग कर दी। इस दौरान छर्रा लगने से गांव का दिनेश भी जख्मी हुआ था। पूर्व प्रधान की मौत की खबर पर पूर्व प्रधान पक्ष के लोगों में आक्रोश भड़क गया और उन्होंने वर्तमान प्रधान सुरेश चंद बघेल के मकान व घेर में तोड़फोड़ करने के साथ हवाई फायरिंग भी कर दी, लेकिन गनीमत रही कि उस वक्त घर व घेर में कोई नही था।



पांच दिन से लापता थे वर्तमान प्रधान
गांव प्रधान सुरेश चंद बघेल पिछले पांच दिन से गांव से लापता थे। इस संबंध में घटना की सुबह करीब आठ बजे प्रधान के बेटे श्यौराज व अन्य परिजनों ने थाने पहुंचकर सूचना दी कि उनके पिता सुरेश चंद पांच दिन पूर्व अलीगढ़ जाने की कहकर घर से निकले थे लेकिन न तो वे वापस लौटकर आए हैं और न ही उनका फोन मिल रहा है तथा लगातार स्विच ऑफ आ रहा है। बाद में वे तलाशने बात कहकर बिना लिखित शिकायत दिए लौट गए थे।



अभियोजन पक्ष की अपील
हत्या बेहद सनसनीखेज थी। घटना के समय के चार नामजद व साजिश के आरोपी पूर्व प्रधान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। बाकी विवेचना में जिनके नाम उजागर किए गए थे, उन्हें बरी किया गया है। इसमें फैसले पर अध्ययन के बाद तय किया जाएगा कि बरी किए गए लोगों के खिलाफ अपील की जाए या नहीं। -रामकुमार, एडीजीसी



बचाव पक्ष की दलील
जब मुकदमे में पांच लोग नामजद किए गए। उन्हें ग्रामीणों व चश्मदीद खुद मृतक के भाई मनोज द्वारा पहचाना गया। मगर क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य परिवार के सदस्य बंटी को नहीं पहचाना गया, जबकि वह उसी क्षेत्र का है। जिला पंचायत के चुनाव में लगातार जनसंपर्क में गांव में आता है। दूसरा सिर्फ एक आरोपी के बयानों के आधार पर बंटी सहित अन्य का नाम खोला गया। कुल मिलाकर पुलिस द्वारा विवेचना में जो दलील दी गईं। वे हमारी जिरह के दौरान अदालत में खड़ी नहीं हो पाईं। उसी आधार पर न्यायालय ने हमारे तर्क स्वीकारते हुए विवेचना में उजागर हुए लोगों को बरी किया है। फैसला स्वागत योग्य है।-नीरज चौहान, अधिवक्ता बचाव पक्ष



कुल 11 गवाह किए गए पेश
इस मुकदमे में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाह पेश किए गए। जिनमें वादी, चश्मदीद भाई सहित पब्लिक के चार, एक पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर व अन्य पुलिस के विवेचक व लेखक आदि गवाह थे।



मेरे बड़े भाई का नाम इस हत्याकांड में सिर्फ राजनीतिक विद्वेष व दबाव में आया था। जबकि जगधीर से व्यक्तिगत संबंध बहुत अच्छे थे। मेरे दो भाई व चाचा की हत्या के बाद हमारी रंजिश चल रही है। उसी क्रम में यह आरोप लगा था। मगर न्यायालय ने हमारे साक्ष्यों व गवाही के आधार पर हमें बरी किया है। फैसला स्वागत योग्य है। -राहुल सिंह, जिला पंचायत सदस्य पति, बंटी का भाई
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