डॉ. पास्तोरे ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि बेल्जियम की गेंट यूनिवर्सिटी में एमए में हिंदी है, जिसमें पांच-छह छात्र-छात्राएं पढ़ रही हैं। हालांकि, हिंदी विषय की पढ़ाई करना अनिवार्य नहीं है। फिर भी प्रयास होगा कि हिंदी को लेकर विद्यार्थियों में रुचि पैदा की जाए।
इटली मूल की हिंदी की शोधार्थी और बेल्जियम की गेंट यूनिवर्सिटी के कला व दर्शन संकाय में सीनियर प्रोजेक्ट फेलो डॉ. रोसीना पास्तोरे ने कहा कि हिंदी फिल्में देखकर हिंदी भाषा और साहित्य के प्रति उनका अनुराग बढ़ा है।
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डॉ. पास्तोरे ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि बेल्जियम की गेंट यूनिवर्सिटी में एमए में हिंदी है, जिसमें पांच-छह छात्र-छात्राएं पढ़ रही हैं। हालांकि, हिंदी विषय की पढ़ाई करना अनिवार्य नहीं है। फिर भी प्रयास होगा कि हिंदी को लेकर विद्यार्थियों में रुचि पैदा की जाए। उन्होंने कहा कि वेदांत दर्शन को समझने के लिए हिंदी और ब्रजभाषा को पढ़ रही हैं। उन्हें भारत की कला-संस्कृति अच्छी लगती है। एएमयू के हिंदी विभाग में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. रोसीना ने ब्रजभाषा के रीतिकालीन कवि महाराजा जसवंत सिंह की रचनाओं पर वेदांत का प्रभाव जैसे गंभीर विषय पर में अपना विशेष व्याख्यान प्रस्तुत किया।
रोसीना पास्तोरे ने स्विटजरलैंड के लूजेन विश्वविद्यालय के भारतीय दर्शन विभाग से ‘महाराजा जसवंत सिंह की रचनाओं पर वेदांत का प्रभाव’ विषय पर अपना पीएचडी शोधकार्य पूरा किया है। हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. आशिक अली व इतिहास विभाग की अध्यक्ष प्रो. गुलिफ्शां खान की उपस्थिति में रोसीना पास्तोरे ने के हिंदी विभाग के प्राध्यापकों और शोधार्थियों के समक्ष जसवंत सिंह की रचनाओं के हवाले से उन पर वेदांत के प्रभाव को रेखांकित किया। इस अवसर पर डॉ. मोहम्मद नजरुल बारी, अजय बिसारिया आदि मौजूद रहे।