प्रख्यात इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब ने कहा कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कहना है कि वर्ष 2014 से पहले इस देश में कुछ नहीं हुआ, बल्कि वर्ष 2014 के बाद हुआ है। सोमवार को धर्मपुर कोर्टयार्ड में पाठ्य पुस्तकों में से कुछ ऐतिहासिक हिस्सों को हटाए जाने पर आयोजित व्याख्यान में वह बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। प्रो. इरफान ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद को ही वह इतिहास बनाना चाहते हैं। अपनी बयानबाजी से अपना प्रचार तो कर सकते हैं, लेकिन इतिहास नहीं बना सकते हैं। वर्ष 1947 में जब देश आजाद हुआ तो प्रधानमंत्री नेहरु ने भूमिहीन लोगों को भूमि दिलवाई।
देश को छुआछूत प्रथा से मुक्त करवाया। देश में रोजगार के अवसर, विकासशील बनाने के उद्देश्य से बड़े-बड़े कारखाने और उद्योग लगाने की प्रक्रिया शुरू की तो इस आधार पर हम उनसे पूछते हैं कि वह किस आधार पर देश की मौजूदा स्थिति को कैसे अपना इतिहास बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जब वह अपने मंसूबों में सफल होते नहीं दिख रहे हैं तो उन्होंने इस काम के लिए सरकारी स्वामित्व वाले देश के प्रकाशन केंद्र एनसीआरटी को अपना हथियार बनाकर पाठ्यक्रमों में परिवर्तन करा रही है।
भारतीय इतिहास कांग्रेस देश के इतिहास से छेड़छाड़ और उस पर हो रहे हमलों से काफी चिंतित है, जिसको लेकर भारतीय इतिहास कांग्रेस ने पिछले इतिहास के नाम से मुहिम चलाई गई है। प्रो. नदीम रेजावी ने कहा कि वर्तमान समय में जैसे प्राचीन इतिहास को खंगाला जा रहा है, उसमें अपनी विचारधारा रखने की कोशिश की जा रही है। भारत गंगा जमुनी तहजीब का देश है और उसको सहज मिटाया नहीं जा सकता। इंजीनियर केसी शर्मा, सुशील गुप्ता आदि ने विचार व्यक्त किए। संचालन पूर्व विधायक विवेक बंसल ने किया।
ये रहे मौजूद
प्रो. शीरीन मूसवी, प्रो. एसके मिश्रा, डॉ. एमएस सुल्तान राव, प्रो. इशरत आलम, डॉ. नरेश शर्मा, डॉ. नजर अब्बास, डॉ. अमजद अली रिजवी, डॉ. राकेश सक्सेना, प्रो. शहाबुद्दीन इराकी, प्रो. राजेश कुमार, मदीउर रहमान, डॉ. सैयद अली खान, डॉ. शंभू दयाल रावत, डॉ. अजय बिसारिया, डॉ. ओमवीर सिंह, सुरेश साहित्यकार आदि मौजूद रहे।