संसाधनों में भले ही भारत से चीन आगे हो, लेकिन जनसंख्या के मामले में भारत ने अपने पड़ोसी देश को पीेछे छोड़ दिया है। शिक्षाविद् से लेकर विधि के जानकार का मानना है कि जनसंख्या का बढ़ना देश के लिए शुभ संकेत नहीं है। अब ठोस कानून बनाने की जरूरत है। जैसे, चीन ने जनसंख्या के मामले में कानून बनाया था। भारत की जनसंख्या 142.86 करोड़ है, जबकि चीन की जनसंख्या 142.57 करोड़ है। यह आंकड़ा संयुक्त राष्ट्र की तरफ से जारी किया गया है।
जनसंख्या विस्फोट से भविष्य में दिक्कतें होंगी। भले ही युवा देश होने पर खुश हो जाएं, लेकिन आने वाले समय में जब बेरोजगारी की समस्या बढ़ेगी तो काफी तकलीफदेह होगी। इस पर सरकार को ठोस कानून बनाना चाहिए। -प्रो. शर्मिला शर्मा, शिक्षाविद्
बेतहाशा जनसंख्या का बढ़ना ही समस्या की तरफ इशारा करती है। युवाओं का देश भारत होगा, लेकिन समस्याएं भी नई-नई आएंगी। रोजगार के अवसर कम होंगे तो अपराध बढ़ेंगे। दो बच्चे को लेकर अब सख्त कानून बनाना होगा। -प्रो. सपना सिंह, समाजशास्त्री
जनसंख्या को लेकर चेते नहीं तो चिंता हो जाएगी। जमीन बढ़ेगी नहीं, संसाधन बढेंगे नहीं, लेकिन आबादी बढ़ेगी तो समस्या विकराल हाेने वाली है। नौकरी के लिए लंबी-लंबी कतारें लगेंगी। तादाद बढ़ेगी, गुणवत्ता की कमी आएगी। -प्रो. फरीद खान, विधि के जानकार
जनसंख्या बढ़ने से फायदा कुछ नहीं, केवल नुकसान ही नुकसान है। लोगों को रोजगार भी चाहिए। जब रोजगार होगा, तभी वह अपने बच्चों को सही से पढ़ा सकेंगे, लेकिन जनसंख्या विस्फोट में ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा है। -प्रो. नीता वार्ष्णेय, टीआर महाविद्यालय