सोल्डर शाबाश..! बैकिंग सिस्टम हेडिंग भगोड़ों के ६८ हजार करोड़ बट्टे खाते में और में छोटे व्यापारियों-आमजन को लोन का टोटा आशीष निगम अलीगढ़। आरटीआई के एक जवाब में रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने हाल ही में बताया है कि देश में ५० बड़े बकायेदारों के ६८ हजार ६०७ करोड़ रुपये को बट्टे खाते में डाल दिया गया है। अमर उजाला के बुधवार के अंक में इस खुलासे के बाद से देश में सियासी घमासान चल रहा है। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण, भारी उद्योग एवं सार्वजनिक उद्यम मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को सफाई देनी पड़ रही है। नेताओं ने दावा किया भगोड़े बकायेदारों से लगभग १८ हजार करोड़ रुपये की वसूली की गई है। एक तरफ ५० रसूखदार लोग हैं, जो ६८६०७ करोड़ रुपये डकार कर फरार हैं। दूसरी ओर जरूरतमंद हैं जिनको वर्तमान ५० हजार रुपये का लोन नसीब नहीं हो रहा है। बैंकिंग सिस्टम की ये दोहरी तस्वीर पहली बार जनता के सामने नहीं आई है। इससे पहले भी कई बार ये देखा और सुना जा चुका है। अलीगढ़ में वर्तमान में सरकारी और निजी बैंकों में जरूरत का लोन लेेने पहुंच रहे लोगों को एक के बाद एक कई कारण गिना कर चलता किया जा रहा है। खुद लीड बैंक मैनेजर रविंद्र प्रसाद मानते हैं कि वर्तमान में सामान्य जनता के छोटे लोन मुश्किल से भी नहीं हो रहे हैं। केवल सरकारी नौकरीपेशा, ए श्रेणी की कंपनी या खास ग्राहकों के ही लोन हो रहे हैं। ------------- तीन वर्गों को आसानी से लोन १-केंद्र, राज्य सरकार, अद्र्ध सरकारी, नवरत्न कपंनियों में सेवारत में कार्यरत कर्मियों को हर तरह का लोन उपलब्ध है, जिनका वेतन ५० हजार या उससे अधिक है, वह प्रीमियम लोन ग्राहक हैं। २-प्राइवेट सेक्टर की कंपनियों को श्रेणियों में बांटा गया है। इसमें जो कंपनी ए श्रेणी में है, उसके कर्मियों को वर्तमान तनख्वाह के आधार पर कुछ लोन किए जा रहे हैं। ३-व्यापारियों, छोटे कारोबारियों को व्यापार चलाने, आगे बढ़ाने के लिए फिलहाल लोन नहीं मिल रहा है। उनको अभी कुछ हफ्ते तक इंतजार करना होगा। ----------- लोन नहीं देने के कारण १-केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी की आपदा को देखते हुए फिलहाल लोन की ईएमआई भुगतान में तीन महीने की छूट दे दी है। कोरोना संक्रमण बढऩे की आशंका में ये अवधि और बढ़ सकती है। इसलिए बैंक ईएमआई लेट होने के डर से लोन देने से पीछे हट रहे हैं। २-बैंकों में स्टाफ कम संख्या में बुलाया जा रहा है। आवागमन कम होने से फाइलों का भौतिक सत्यापन नहीं हो पा रहा है। कुछ बैंकों के मुख्यालय में कामकाज प्रभावित होने का असर भी बताया जा रहा है। ------------ बाक्स--- ये कहते हैं बैंक के अधिकारी १-एचडीएफसी के रिलेशनशिप मैनेजर जय नंदन ने बताया कि वर्तमान में सरकारी सेवारत कर्मी और ए श्रेणी की कंपनियों के वेतनभोगी कर्मियों को पर्सनल लोन आदि की सेवाएं दी जा रही है। टू व्हीलर, फोर व्हीलर, होम लोन सहित अन्य लोन के आवेदन में प्रक्रिया पूरी नहीं होने के कारण फिलहाल बंद हैं। २-यस बैंक के वरिष्ठ कर्मी दीपक कोल ने बताया कि उनकी एक मात्र शाखा में केवल एक बिजनेस लोन हो रहा है, जो एक करोड़ के टर्नओवर पर मिलता है जिसकी शुरुआत २० लाख से होती है। दूसरा कोई छोटा बिजनेस लोन नहीं है। ३-एक्सिस बैंक के वरिष्ठ अधिकारी निजाम अहमद ने बताया कि उनके पर्सनल खातेदारों को लोन मिलने में असुविधा नहीं है। बशर्ते फाइल की प्रक्रिया पूरी हो जाए। जब तक लॉकडाउन नहीं खुलता इस तरह के लोन की प्रक्रिया पूरी होने में समय लगेगा। इसलिए इसमें परेशानी हो रही है। ४-आईसीआईसीआई बैंक के रीजनल स्तर के अधिकारी ने कहा है कि उनके यहां असुविधा इतनी नहीं है। लेकिन स्थानीय स्तर पर फाइल की प्रक्रिया पूरी होने में समय अधिक लग रहा है। जिससे लोन होने में परेशानी हो रही है। ५-लीड बैंक मैनेजर रविंद्र प्रसाद ने भी माना है कि वर्तमान में लॉकडाउन में बैंकों में स्टाफ कम होने, कुछ स्थानों पर निजी बैंकों में मुख्यालय के पूरी क्षमता में काम नहीं करने से असुविधा है। जिसकी वजह से लोन होने में परेशानी है। कुछ बैंकों ने अभी तक मार्च की रिपोर्ट भी नहीं भेजी है