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फादर्स डे: पिता है तो बच्चों के सारे सपने हैं, पिता है तो बाजार के सब खिलौने अपने हैं

Sun, 18 Jun 2023 02:11 AM IST
चमन शर्मा इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़

सार

फादर्स डे (18 जून) पर कुछ ऐसे पिता-पुत्र और पुत्री की कहानी है, जो हौसले को बढ़ाती है। हर कदम और हर फैसले पर पिता का साथ होता है। पापा ने बच्चों के जीवन की राहें आसान बनाई, इसलिए वह बच्चों के अभिमान बन गए।  
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पिता के साथ हर पल एक जश्न है - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक पिता की अहमियत क्या होती है, ये उनसे पूछिए, जिसने आसमान रूपी छाया अपने सिर से खोया हो। पिता के महत्व को कवि पंडित ओम व्यास ने “पिता रोटी है, कपड़ा है, मकान है, पिता नन्हे से परिंदे का बड़ा आसमान है, पिता है तो बच्चों के सारे सपने है, पिता है तो बाजार के सब खिलौने अपने हैं”, के जरिये रेखांकित किया है। 

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सच में पिता के होने से बाजार के खिलौने अपने हैं। फादर्स डे (18 जून) पर कुछ ऐसे पिता-पुत्र और पुत्री की कहानी है, जो हौसले को बढ़ाती है। हर कदम और हर फैसले पर पिता का साथ होता है। पापा ने बच्चों के जीवन की राहें आसान बनाई, इसलिए वह बच्चों के अभिमान बन गए।  

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बेटी की कामयाबी पर जन्नत में मुस्कराए अब्बू
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में जोहा हैदर की कामयाबी पर जन्नत में उनके अब्बू डॉ. सैयद रजा हैदर जरूर मुस्कराए होंगे। नीट में सफलता पाकर जोहा ने अब्बू के ख्वाब को पूरा करने की दिशा में पहला कदम बढ़ा दिया है।डॉ. हैदर अपनी बेटी को डॉक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन परीक्षा में बेटी के सफल होते देखने से पहले वह दुनिया छोड़कर जा चुके थे। जब नीट के नतीजे आए तो जोहा हैदर खुश हो गईं। मां डॉ. सल्तनत भी उनकी खुशी में शामिल हो गईं। मगर इस खुशी के बीच एक मायूसी भी थी, क्योंकि जिस पिता (डॉ. हैदर) की आंखों में बेटी को डॉक्टर बनाने का ख्वाब था। वह आंखें इस खुशी में शामिल नहीं थीं।

डॉ. हैदर का 24 अप्रैल 2021 को कोरोना संक्रमण के चलते इंतकाल हो गया था। डॉ. हैदर दिल्ली में गालिब इंस्टीट्यूट के निदेशक थे। जोहा ने कहा कि अब्बू के इंतकाल पर वह टूट गई थीं, लेकिन उनके ख्वाब को पूरा करने के लिए खुद को संभाला और पढ़ने में जुट गई। नतीजा उनके और अब्बू के हक में आया। जोहा ने कहा कि 4 अप्रैल 2021 को  अब्बू का इंतकाल हो गया। इससे कोचिंग की फीस को लेकर चिंता बढ़ गई। इसी बीच बंसल क्लासेज ने उनकी कोचिंग की फीस माफ कर दी। वह उनकी शुक्रगुजार हैं। 

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पापा पर बेटे को गर्व

अक्सर, पिता को अपने बेटे पर गर्व होता है, लेकिन बेटे को अपने पिता पर अभिमान है। गरीबी के चादर में लिपटे राजीव अग्रवाल ने अपने परिश्रम और इच्छा शक्ति से अरबों रुपये का व्यापार स्थापित कर लिया है। शहर में राजीव अग्रवाल अब राजीव अग्रवाल प्लस प्वाइंट के रूप में जाने जाते हैं। आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी और पढ़ाई में भी कमजोर थे। ऐसे में उन्होंने व्यापार शुरू किया, लेकिन व्यापार में काफी उतार-चढ़ाव देखे। व्यापार ठप हो गया। राजीव अग्रवाल ने हिम्मत नहीं हारी। एक के बाद एक नए प्रयोग करते गए। इसमें उनका यूनिक हैंडल ऐसा हिट हुआ कि आज अरबों रुपये का कारोबार स्थापित हो गया। 



 राजीव अग्रवाल के बेटे निकित अग्रवाल ने अपने पापा (राजीव अग्रवाल) को संघर्ष करते हुए देखा। उनकी असफलताओं से उनका मन कई विचलित भी हुआ, लेकिन पापा पर उन्हें भरोसा था कि एक दिन वह जरूर कामयाब होंगे। उनकी मेहनत और लगन रंग लाई और वह शहर के कामयाब कारोबारी बन गए। फादर्स डे पर उन्हें अपने पापा पर गुरूर है। उनके लिए पापा एक आदर्श पिता हैं। उनसे सीख मिलती है कि परिश्रम से घबराना आना चाहिए। 

पिता ने टूटने नहीं दिया बेटी के हौसले को
कंपनी सेक्रेटरी (सीएस) की परीक्षा में बेटी लगातार दो बार एक-दो नंबर से फेल हो रही थी। बेटी का हौसला टूट रहा था, लेकिन पिता उस हौसले को अपनी शाबाशी और अगले साल हो जाएगा, से जोड़ रहे थे। महानगर के विद्या नगर कॉलोनी के प्रदीप के गुप्त की बेटी स्वीकृति गुप्ता आज कंपनी सेक्रेटरी बनकर कई नामी कंपनियों के साथ जुड़ी हैं।



वह कहती हैं कि अगर पापा हौसला नहीं बढ़ाते तो सीएस की परीक्षा से खुद को अलग कर लेती, लेकिन पापा को उन पर भरोसा था और उन्हें पापा के भरोसे पर। खैर, दो साल की असफलता के बाद वर्ष 2020 में परीक्षा में पास हो गई। इसमें पापा की अहम भूमिका है। फादर्स डे पर उन्हें नमन करती हैं।  ऐसे पापा खुशनसीब लोगों को मिलते हैं, जो अपने बच्चों की काबिलियत पर भरोसा करते हैं। 

 प्रदीप के गुप्त ने कहा कि उन्हें अपनी बेटी की क्षमता पर भरोसा था। उसने उनके भरोसे को कायम रखा। वह लगातार फेल होने से टूट रही थी, लेकिन उसे बार-बार हौसला दे रहे थे कि तुम कर पाओगी। बस, धीरज रखना। जब समय आएगा, तो परिणाम तुम्हारे पक्ष में आएगा। जब परिणाम आया तो स्वीकृति को परीक्षा में सफल होने की स्वीकृति मिल चुकी थी। इससे सभी भावुक हो गए।
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