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रावण घुमाएगा गर्दन तो कुंभकरण करेगा अट्टहास

सार

नुमाइश मैदान पर दशहरा पर रावण का पुतला खास होगा, जो ठहाके लगाने के साथ ही अपनी गर्दन भी चारों ओर घुमाएगा।इस परिवार की तीन पीढ़ियां रावण के पुतले बनाती आ रही हैं।
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विस्तार
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नुमाइश मैदान पर दशहरा पर रावण का पुतला खास होगा, जो ठहाके लगाने के साथ ही अपनी गर्दन भी चारों ओर घुमाएगा। उसकी गर्जना से पूरा मैदान गूंज उठेगा। इतना ही नहीं, कुंभकरण और मेघनाद के पुतले भी अट्टहास करेंगे, जो दर्शकों को रोमांचित करेंगे। इन पुतलों को तैयार करने में साढ़े चार लाख रुपये का खर्च आएगा। इन पुतलों को बुलंदशहर का मुस्लिम परिवार तैयार कर रहा है। इस परिवार की तीन पीढ़ियां रावण के पुतले बनाती आ रही हैं।
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असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक माने जाने वाला दशहरा पूरे उल्लास के साथ मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, दशहरे पर राम द्वारा रावण से युद्ध करने के बाद कुंभकरण और मेघनाद का वध किया जाता है। इसके उपरांत पुतलों का दहन किया जाता है। रावण का पुतला तैयार करने वाले कारीगर अशफाक ठेकेदार निवासी दानपुर, डिबाई, बुलंदशहर ने बताया कि पुतले बनाने का काम उनके पुरखों करते आ रहे हैं।
जब वह दस वर्ष के थे, तब से अब्बा गफूर के साथ पुतला बनाने का काम कर रहे हैं। अलीगढ़ में पांचवीं बार पुतले तैयार कर रहे हैं। इसके अलावा नागपुर, मुंबई, गुजरात, दिल्ली आदि राज्यों में रावण आदि के पुतले तैयार कर चुके हैं। अशफाक ने बताया कि इस बार महंगाई काफी बढ़ चुकी है। कोरोना काल से पहले पुतले बनाने का ठेका 2.25 लाख रुपये में लेता था। इस बार साढ़े चार लाख रुपये का खर्चा आ रहा है।
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इन पुतलों के अलावा सोने की लंका तैयार करने का भी ठेका मिला है। नयनाभिराम आतिशबाजी भी होगी। अबकी बार इन पुतलों में यह खासियत है कि जब राम-लक्ष्मण के बाण से इन्हें मारा जाएगा, तब रावण ठहाके लगाएगा और उसकी गर्दन भी चारों ओर घूूमेगी। उन्होंने बताया कि पुतलों का निर्माण करने में परिवार के 12 सदस्यों को एक महीने से ज्यादा समय लगेगा।
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