स्मार्ट सिटी के पांच वर्ष के कार्यों पर भाजपा विधायक अनिल पाराशर द्वारा सवाल उठाए जाने के मामले में शासन से जांच जिला प्रशासन को सौंपी गई है। इस पर जिलाधिकारी स्तर से जांच शुरू कराते हुए बजट की गड़बड़ी और उनसे जुड़े आरोपियों को चिह्नित कराना शुरू कर दिया है। विस्तृत जांच के बाद ही रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
विधायक ने मार्च में यह शिकायत मुख्यमंत्री व नगर विकास मंत्री को दी थी। जिसमें स्मार्ट सिटी के कार्यों में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि 2017-18 में स्मार्ट सिटी परियोजना मंजूर हुई थी। 2018 में काम शुरू हुए, जिसमें 42 कार्य किया जाना तय हुआ। इसके कार्यों की गुणवत्ता के साथ ही समयबद्धता, एबीडी एरिया में पेयजल योजना, चौराहों व पार्कों का सौन्दर्यीकरण, आईसीसीसी, सीवर लाइन व सड़कों का सौन्दर्यीकरण की लागत में स्पष्टता नहीं हैं। आगणन भी कई गुना अधिक दिखाई देता है। जिसमें सरकारी धनराशि का अपव्यय झलकता है। सीएम स्तर पर संज्ञान लेने के बाद प्रमुख सचिव नगर विकास ने जांच के निर्देश दिए हैं।
यह जांच शासन से मंडलायुक्त और वहां से जिलाधिकारी को पहुंची है। डीएम ने आरोपों व उससे जुड़े लोगों का चिह्नांकन शुरू करा दिया गया है। जांच रिपोर्ट जल्द शासन को भेजी जाएगी। इस योजना में अब तक डेढ़ दर्जन काम सतह पर आए हैं। पिछले दिनों स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया है। नगर आयुक्त अमित आसेरी इतना ही कहते हैं कि यह उनके आने से पहले का मामला है, इसलिए ज्यादा कुछ नहीं कह सकते। जिलाधिकारी ने कहा है कि स्मार्ट सिटी से जुड़े कार्यों में गड़बड़ी करने एवं लापरवाही बरतने वालों को चिन्हित किया गया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ब्यूरो