अमर उजाला ब्यूरोअलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में मौलाना आजाद पुस्तकालय में इमाम हुसैन के अब्बू हजरत अली के संदेश पर आधारित दुर्लभ पांडुलिपि नाजुल बलागा है। पहली पांडुलिपि ईरान में है। हजरत अली की यौमे पैदाइश पर पुस्तकालय में पुस्तक प्रदर्शनी लगी।
पुस्तकालय में नाजुल बलागा है, जो हजरत अली से संबंधित है। नाजुल बलागा, जिसे हाफिज शिराजी ने कत्थे और नाखून से लिखा है। हफ्त बंद कशी पांडुलिपि, जिसे आसिफ खान ने लिखी है, जो मुमताज महल के पिता थे। 50 से ज्यादा दुर्लभ पांडुलिपि हैं। हजरत अली के हाथों से लिखी चर्म पत्र पर कुरान की आयत है।
प्रदर्शनी का उद्घाट कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने किया। पुस्तकालयाध्यक्ष प्रो. निशात फातिमा ने बताया कि हजरत अली से जुड़ी दुर्लभ चीजें लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती हैं। पांडुलिपियों को शीशे के केस में रखा गया है। पांडुलिपियों को देखने के लिए लोगों की भीड़ रही। इस मौके पर सह कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज आदि मौजूद रहे।