जिले में निराश्रित पशु किसानों के लिए बहुत बड़ी समस्या हैं। फसल खराब करने से बचाने के लिए किसान अपने खेतों के चारों ओर कंटीले तार लगाते हैं, लेकिन इन तारों में फंस कर अक्सर पशु घायल हो जाते हैं। इसको देखते हुए प्रदेश सरकार ने निराश्रित पशुओं को खेतों में जाने से रोकने के लिए कांटेदार तारों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगा दी है।
किसानों द्वारा लगाए जा रहे कंटीले व ब्लेड वाले तारों पर प्रतिबंध लगाकर पशु क्रूरता को रोकने का निर्देश दिया है। इससे किसानों में नाराजगी है। कह कि सरकार पहले निराश्रित पशुओं को पहले आश्रय स्थल उपलब्ध कराए। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग की सिफारिशों को मानते हुए सरकार ने खेतों में पशुओं के प्रवेश को रोकने को कंटीले तारों को लगाने को पशु क्रूरता निवाररण अधिनियम का उल्लंघन माना है।
पशुओं के साथ गलत व्यवहार, उनको यातना या पीड़ा देना इस अधिनियम में आता है। इसको लेकर किसानों में नाराजगी है। गभाना क्षेत्र के सोमना निवासी सुनील कुमार सिंह का कहना है कि सरकार ने अपना फरमान तो जारी कर दिया है, लेकिन बेहतर होता कि पहले निराश्रित पशुओं को पकड़कर उनके खाने, पीने और रहने की व्यवस्था कराती। ताकि यह पशु फसलों को नुकसान न पहुंचा सकें।
सरकारी आदेश के अनुसार अब किसान खेतों के किनारे सिर्फ रस्सी ही लगा सकेंगे। ऐसे में पशु आसानी से खेतों में प्रवेश कर खड़ी फसल को बर्बाद करेंगे। लालपुर गांव के रामगोपाल सिंह का कहना है कि सरकार को निराश्रित पशुओं के लिए आश्रय स्थल बनाने चाहिए। भले ही गांव स्तर पर न बनें, लेकिन ब्लॉक या तहसील स्तर पर इनके निर्माण से काफी हद तक किसानों की समस्या का समाधान हो सकेगा।