पूछताछ में स्वीकारा कि निखिल बीटेक इंजीनियर है और नवंबर माह के शुरुआत में ही बहराइच से इसी तरह की ठगी में चार साल बाद जेल से छूटा है। इससे पहले अमरोहा से 2017 में जेल गया था। उसने आते ही फिर पश्चिमी यूपी के जनपदों के थाना प्रभारियों के सीयूजी नंबर की सूची लेकर उन्हें कॉल करना शुरू किया। खुद की ओर से मुखबिरी का ऑफर देकर 4 से 5 हजार रुपये ऐंठना शुरू किया। अब तक वह अपने खाते में करीब 100 थानेदारों से इस तरह से रकम गूगल पे एकाउंट में ले चुका है। इसमें एक साथी भोला अभी फरार है। उसकी तलाश की जा रही है।
किसी मजबूर की आईडी पर लेते थे सिम
निखिल के अनुसार वह किसी भी मजदूर, गरीब व मजबूर व्यक्ति से उसकी आईडी रुपये देकर लेते थे और उस आईडी से सिम खरीद लेते थे। उसी सिम से कॉल करते और गूगल एकाउंट बनाकर उसी में रुपये लेते। रुपये मिलते ही सिम तोड़कर फेंक देते थे। इनके पास से तीन मोबाइल, पांच सिम, कोतवालों के सीयूजी नंबरों की लिस्ट, पांच फर्जी आधार कार्ड, 7100 रुपये बरामद हुए हैं। फरार की तलाश जारी है।
जवां के अलावा इगलास, छर्रा को भी किए थे कॉल
गैंग सरगना पर अलीगढ़ के जवा, छर्रा, इगलास व कोतवाली में चार मुकदमों सहित प्रदेश में कुल 10 मुकदमे दर्ज हैं। इसके अलावा अन्य पर भी मुकदमे दर्ज हैं। निखिल ने जवां के साथ-साथ इगलास, कोतवाली व छर्रा के थानेदारों को भी फोन कर ठगने का प्रयास किया था। तभी से इस गैंग को रडार पर लिया गया।
-इस गैंग के सरगना सहित तीन सदस्य दबोचे गए हैं, एक अभी फरार है। यह गैंग सरगना नवंबर में छूटकर आने के बाद सक्रिय हुआ और पश्चिमी यूपी के कई जिलों में ठगी की। हमारी टीम ने इसे दबोचा है। - कलानिधि नैथानी, एसएसपी।