जिले भर में गणेश चतुर्थी को स्थापित गणेश प्रतिमाओं के पूजा-अर्चन के साथ ही उनके विसर्जन का सिलसिला अब शुरू हो गया है। भक्तजन विघ्नहर्ता गणपति की प्रतिमाओं को पूजा-अर्चना के मध्य विसर्जन करने को झूमते और गाते हुए गंगातटों पर पहुंचे। इस दौरान जमकर रंग, अबीर- गुलाल उड़ाया गया। जगह-जगह पुष्पा वर्षा कर श्रीगणेश जी का स्वागत किया गया।
1100 दीपों से सराबोर हुआ गणेश मंदिर
प्राचीन सिद्ध पीठ श्री गणेश मंदिर, अचलताल पर बुधवार को आठवें दिन 1100 दीपक दान कर महाआरती का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में भक्तों ने महाआरती में हिस्सा लिया। महाआरती मंदिर के महंत विनय नाथ महाराज ने की। शंखनाद होते ही मंदिर परिसर में भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। मीडिया प्रभारी ललित वार्ष्णेय, पार्षद अलका गुप्ता, शिखा वार्ष्णेय, दीपका वार्ष्णेय, कामिनी, कृपा देवी, प्रतिमा, मोना, मानसी, दीपक वार्ष्णेय, कपिल, डब्बू सक्सेना, भुवनेश आधुनिक, तेजेंद्र गुप्ता मौजूद रहे।
श्री वार्ष्णेय मंदिर में 501 थालों से हुई गजानन की महाआरती
संस्कार भारती उत्सव द्वारा आयोजित श्रीगणेश पूजा महोत्सव के तहत श्री वार्ष्णेय मंदिर में 501 थालों से गजानन की महाआरती कर महाभोग भी लगाया गया। भजन गायिका कीर्ति कौशिक के भजनों पर भक्त झूमने पर मजबूर हो गए। आयोजन में सुरेंद्र कुमार गुप्ता, मुंशीलाल, अरुण वार्ष्णेय, वरुण वार्ष्णेय, डॉ. नीलम शर्मा, इं. राजीव शर्मा, सुमन गुप्ता, भुवनेश आधुनिक आदि का सहयोग रहा।
जलाशय में नहीं फेंके प्रतिमाएं, सम्मान से प्रवाहित करें
ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा ने कहा है कि गणेश प्रतिमाओं को जलाशय में नहीं फेंके। उन्हें पूरे आदर और सम्मान के साथ वस्त्र और समस्त सामग्री के साथ धीरे-धीरे बहाएं। श्री गणेश इको फ्रेंडली हैं तो पुण्य अधिक मिलेगा, क्योंकि वे पूरी तरह से पानी में गलकर विलीन हो जाएंगे। अगर विसर्जन घर में ही कर रहे हैं तो गमले को सजाएं, पूजन करें। अंदर स्वास्तिक बनाएं और थोड़ी शुद्ध मिट्टी मिलाकर मंगल मंत्रोच्चार के साथ गणेश प्रतिमा को बिठाएं। गंगा जल डालकर उनका अभिषेक करें। फिर सादा स्वच्छ शुद्ध जल लेकर गमले को पूरा भर दें। श्रीगणेश प्रतिमा गलने लगेगी तब उनमें फूलों के बीज डाल दें। ध्यान रखें कि प्रसाद गमले में न रखें। श्रीगणेश को भावविह्वल होकर प्रणाम करें। गमला घर की किसी स्वच्छ जगह पर रखें।