एएमयू के शिक्षक संघ ने पूर्व कुलपति पर आरोप लगाया कि वह लोकतंत्र को बहाल कराने में नाकाम रहे। नए कुलपति का पैनल बनाने में दिलचस्पी नहीं ली। अमुटा ने एक बार फिर एसी, कोर्ट सदस्य के रिक्त पदों को भरने और शिक्षक संघ का चुनाव कराने की आवाज उठाई है।
चुनाव सहित कई मुद्दों पर शिक्षकों ने वित्त अधिकारी, परीक्षा नियंत्रक, प्रॉक्टर, कुलपति के ओएसडी और रजिस्ट्रार के साथ बैठक की। शिक्षक प्रो. मोहम्मद खालिद, प्रो. मुइन उद्दीन, डॉ. अशरफ मतीन, डॉ. ओबैद अहमद सिद्दीकी, डॉ. इशात मोहम्मद खान, डॉ. मोहम्मद अरशद बारी, डॉ. मुराद खान, डॉ. मुसव्विर अली, डॉ. मोहम्मद शारिक, डॉ. जमील अहमद ने बताया कि पूर्व कुलपति ने जानबूझकर चुनाव नहीं कराया। अमुटा शिक्षकों का एक स्वतंत्र संस्था है, फिर भी कुलपति का हस्तक्षेप था। ऐसा क्यों हुआ, जबकि वह भी अमुटा के सदस्य भी थे।
अमुटा के सचिव द्वारा वित्तीय मामलों के अवैध उपयोग के बारे में भी चिंता जताई गई। इस पर विवि प्रशासन ने कार्रवाई क्यों नहीं की? शिक्षकों ने नए कुलपति के पैनल की बात कही है। कुलपति के ओएसडी ने पूर्व कुलपति द्वारा अमुटा के चुनावों को विफल करने के लिए 19(2) के इस्तेमाल को सही ठहराया। इससे थोड़ी देर के लिए माहौल गंभीर हो गया। शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा कुलपति लोकतांत्रिक व्यवस्था को चोट पहुंचाने की कोशिश करेंगे तो वह अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए सभी लोकतांत्रिक साधनों का सहारा लेंगे। अगर विश्वविद्यालय प्रशासन चुनावों को रोकेगा तो आंदोलन भी करेंगे।