इकराम वारिस, अलीगढ़।
शहर ने पहली बार इस तरह की बारिश नहीं देखी है, बल्कि हर बारिश का गवाह रहा। यह बात अलग है कभी कम तो कभी ज्यादा, लेकिन पिछले दो दिनों से हो रही बारिश से हर कोई खौफजदा हो गया है। मेडिकल कॉलेज के 60 साल के इतिहास में पहली बार वार्डों में पानी घुसा है।
एएमयू के जेएन मेडिकल कॉलेज को काफी सुरक्षित स्थान माना जाता है। ब्लड बैंक और लैब में लगी लाखों रुपये की मशीनें पानी की जद में आ गई हैं। इसमें लाखों रुपये का नुकसान होने अनुमान है। जेएन मेडिकल कॉलेज की स्थापना 1962 में हुई थी। इस बीच मेडिकल कॉलेज के वार्डों में कभी पानी नहीं घुसा था।
बाढ़ व अकाल न पड़ने से अलीगढ़ को चुना सर सैयद
सर सैयद अहमद खान का वह ख्वाब याद आ गया, जब उन्होेंने कहा था कि भविष्य की यूनिवर्सिटी वहां बनाऊंगा, जहां की आबोहवा सबसे बेहतर हो। बाढ़ व अकाल न पड़ने के कारण सर सैयद अहमद खान ने अलीगढ़ का चुनाव किया था।
उन्होंने 9 फरवरी 1873 को बनारस में पहली बैठक में कहा था, वह कोई मदरसा नहीं बना रहे। कोई कॉलेज नहीं बना रहे, बल्कि हम भविष्य की यूनिवर्सिटी बनाने का ख्वाब देख रहे हैैं। सर सैयद ने उस वक्त अलीगढ़ के सिविल सर्जन आर जैक्सन, कलेक्टर हेनरी जार्ज लॉरेंस व पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर हंट की एक कमेटी बनाई, जिन्हें, वहां की भौगोलिक स्थिति जांचने-परखने की जिम्मेदारी सौंपी। कमेटी ने बताया कि यहां न तो बाढ़ आ सकती है और न ही अकाल पड़ सकता है, क्योंकि नदी दूर और 20 फुट के नीचे जल स्रोत है।
बेड पर कराहते रहे मरीज, असहाय परिजनों के छलकते रहे आंसू
जेएन मेडिकल कॉलेज के वार्डों में बारिश का पानी भरने से बेड पर मरीज कराहते रहे तो इन हालात में खुद को असहाय पाकर परिजनों की आंखों से आंसू छलक आए। घुटनों तक भरे पानी के बीच वह अपने-अपने मरीजों की तीमारदारी में जुटे रहे, जब स्थिति विकट हो गई तब मेडिकल कॉलेज प्रशासन को मरीजों को पहली मंजिल पर स्थानांतरित करना पड़ा। हालांकि, अभी तक मेडिकल कॉलेज में पानी भरा है।
जेएन मेडिकल कॉलेज की पुरानी इमारत के वार्डों में भर्ती मरीजों और उनके तीमारदारों की बारिश का पानी अंदर घुसता देख धड़कनें बढ़ने लगीं। वार्ड हो या कॉरिडोर में दो-ढाई फुट पानी भर गया। सुबह से ही मरीज और तीमारदार परेशान हो गए।
तीमारदारों को बैठने के लिए जगह नहीं थी। मरीज के बेड पर ही तीमारदार बैठ गए। इससे उन्हें भी परेशानी हो रही थी, क्योंकि वह एक ही करवट में कई घंटे काट दिए। डॉक्टरों को भी इसी पानी से गुजरकर मरीजों तक पहुंचना पड़ा। हायतौबा की स्थिति पैदा हो गई।
एक बुजुर्ग महिला ने अपने मरीज की जान बचाने के लिए स्टूल पर ग्लूकोज की बोतल पकड़कर खड़ी रहीं। हर तरफ पानी-पानी होने से मरीजों, तीमारदारों और बच्चों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब उन्हें ऊपरी मंजिल पर स्थानांतरित किया गया, तब उन्हें राहत मिली। जेएन मेडिकल कॉलेज के बाहर का क्षेत्र तालाब में तब्दील हो चुका था।
पानी निकालने का इंतजाम कर दिया गया है। जल्द ही पानी की निकासी हो जाएगी। बारिश के चलते इकरा कॉलोनी की तरफ की मेडिकल कॉलेज की दीवार टूट गई थी। इस वजह पानी घुस आया।
-डॉ. मसूद अहमद, डिप्टी प्रॉक्टर एएमयू