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एएमयू में शांति के लिए रोकना होगा बाहरियों को

सार

जिसमें वे बवाल से पहले छात्रों के धरने में देश विरोधी बयान देते कैद पाए गए और उन पर अलीगढ़ में 26 दिसंबर को देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया।इस घटना के बाद शहर भर में फैला उपद्रव, एक मौतइस घटना के एएमयू कैंपस के अलावा पान वाली कोठी, जमालपुर, सराय रहमान, रसलगंज, सराय सुल्तानी, जीवनगढ़, शाहजमाल आदि इलाकों में जाम, प्रदर्शन, पुलिस पर पथराव व पुलिस से टकराव की घटनाएं रुक रुककर कई दिन तक हुईं। उस आधार पर अब आकर यह याचिका खारिज की गई है।पुलिस ने भी एएमयू को दिए थे 19 सुझाव, पूछा था बाहरियों पर रोक को क्या कियाहाईकोर्ट के आदेश पर पिछले दिनों जब कैंपस में आपराधिक घटनाक्रम हुए तो पुलिस की ओर से एएमयू को लगातार पत्राचार किए गए। इसी तरह कोतवाली में ऊपरकोट बवाल में दो मुकदमे एक ही घटना में दर्ज हुए।
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विस्तार
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अभिषेक शर्मा
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आखिर बाहरियों के प्रभाव और परिसर में प्रवेश से देश के उच्च प्रतिष्ठित संस्थान अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय पर कब तक दाग लगता रहेगा। 15 दिसंबर 2019 की रात सीएए-एनआरसी विरोधी उपद्रव के दौरान भी बाहरियों द्वारा फैलाई गई अफवाह और उनके द्वारा कैंपस में घुसकर बखेड़ा खड़ा करने पर उपद्रव की बात उठी थी। अब इसी बात को अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी बल दिया है। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि एएमयू में शांति के लिए बाहरियों का प्रभाव रोका जाए। यह नसीहत हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2019 की घटना से जुड़ी लाठीचार्ज करने वाली पुलिस पर कार्रवाई संबंधी याचिका को खारिज करते हुए दी है।
ऐसे रखी गई उपद्रव और तीन माह रहे तनाव की नीव
साल 2019 में देश में सीएए-एनआरसी का विरोध जगह-जगह शुरू हो गया था। अलीगढ़ में सबसे पहले इसकी शुरुआत दिसंबर माह में छात्रों ने बाब-ए-सैयद पर धरने से की। कई दिन से जारी धरने को पुलिस प्रशासन जैसे तैसे नियंत्रित किए हुए था। छात्रों ने कलेक्ट्रेट कूच तक का एलान किया था। मगर उन्हें संभाले रखा गया। इसी बीच 15 दिसंबर की देर शाम अचानक जामिया दिल्ली में पुलिस लाठीचार्ज की अफवाह कैंपस में आई और यहां छात्र उग्र हो गए। बस उन्हें रोकने और छात्रों के आक्रामक रुख को देख बल प्रयोग करना पड़ गया। जबरदस्त बवाल में दोनों ओर से काफी संख्या में लोग जख्मी हुए। उसी रात यह तय पाया गया कि कैंपस में अफवाह किसी बाहरी ने आकर फैलाई। फिर बाहरियों की एक भीड़ ने आकर लाइब्रेरी पर हंगामा शुरू किया। जिसमें छात्र भी शामिल हुए और बवाल बढ़ गया। अगले दिन पुलिस इंटेलीजेंस की रिपोर्ट आई कि इससे पहले 14 दिसंबर को गोरखपुर के डॉ.कफील छात्रों के धरने में बयान देकर गए। उनके उकसाने पर छात्र उग्र हुए। इस मामले में गिरफ्तारी के बाद कफील पर रासुका तक की कार्रवाई हुई। मगर हाईकोर्ट से उन्हें राहत मिली और पुलिस कार्रवाई को गलत करार दिया गया। इसी बीच बिहार निवासी जेएनयू छात्र शरजिल इमाम का एक वीडियो वायरल हुआ। जिसमें वे बवाल से पहले छात्रों के धरने में देश विरोधी बयान देते कैद पाए गए और उन पर अलीगढ़ में 26 दिसंबर को देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया।
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इस घटना के बाद शहर भर में फैला उपद्रव, एक मौत
इस घटना के एएमयू कैंपस के अलावा पान वाली कोठी, जमालपुर, सराय रहमान, रसलगंज, सराय सुल्तानी, जीवनगढ़, शाहजमाल आदि इलाकों में जाम, प्रदर्शन, पुलिस पर पथराव व पुलिस से टकराव की घटनाएं रुक रुककर कई दिन तक हुईं। एएमयू, जमालपुर, जीवनगढ़ को छात्रों पर सख्ती के बाद किसी तरह शांत करने में पुलिस प्रशासन कामयाब रहा। मगर दिल्ली के शाहीनबाग की तर्ज शाहजमाल में महिलाओं ने धरना शुरू किया जो 56 दिन बाद कोरोना लॉकडाउन की आड़ में खत्म कराया जा सका। इस बीच ऊपरकोट पर उपद्रव के बीच बाबरी मंडी के तारिक नाम के युवक की गोली लगने से मौत हुई। लोग मानते हैं कि अगर लॉकडाउन न लगता तो यह लड़ाई कहां, जाती कुछ कहा नहीं जा सकता।
पुलिस जवाब पर हाईकोर्ट ने अब खारिज की याचिका
इस प्रकरण में मो.अमन खान सहित कई लोगों की ओर से हाईकोर्ट में पुलिस के खिलाफ याचिका दायर की गई थी, जिसमें छात्रों पर लाठीचार्ज को गलत करार देकर कार्रवाई का अनुरोध किया था। पूर्व में इस याचिका की सुनवाई के क्रम में मानवाधिकार आयोग की सिफारिश पर मुआवजा, पुलिस पर कार्रवाई का आदेश दिया और 24 फरवरी 2020 को एएमयू से भी कैंपस में बाहरियों के प्रवेश व प्रभाव पर रोक लगाने व छात्रों से समन्वय करने को कहा गया था। जिसमें पुलिस की ओर से अपनी ओर से मुआवजा दिए जाने व कार्रवाई किए जाने का जवाब दाखिल किया। साथ में एएमयू को पुलिस द्वारा भेजे गए पत्रों का ब्योरा भी दिया गया। उस आधार पर अब आकर यह याचिका खारिज की गई है।
पुलिस ने भी एएमयू को दिए थे 19 सुझाव, पूछा था बाहरियों पर रोक को क्या किया
हाईकोर्ट के आदेश पर पिछले दिनों जब कैंपस में आपराधिक घटनाक्रम हुए तो पुलिस की ओर से एएमयू को लगातार पत्राचार किए गए। जिसमें एक पत्र में 19 सुझाव देते हुए कैंपस में सुरक्षा इंतजामों को लेकर कहा गया। साथ में कैंपस में अपराधियों के रुकने का इशारा किया था। साथ में 16 जून को एक पत्र भेजा गया, जिसमें पूछा गया था कि हाईकोर्ट के आदेश पर आपके स्तर से छात्रों से समन्वय, बाहरियों का प्रभाव व प्रवेश रोकने के संबंध में क्या निर्णय लिया गया। इन पत्रों को भी पुलिस ने अपने जवाब में हाईकोर्ट में दाखिल किया था। ये सभी पत्र व जवाब याचिका खारिज होने में आधार बने हैं।
ये है सिलसिलेवार
- 15 दिसंबर 2019 की रात एएमयू छात्र और बाहरियों से पुलिस का टकराव
- 16 दिसंबर से कई दिन तक शहर में छात्रों पर लाठीचार्ज का विरोध
- एएमयू से धरना खत्म होने के बाद जीवनगढ़ बाईपास पर धरना चला
- 20 जनवरी की शाम शाहजमाल-चरखवालान में पुलिस पर पथराव
- 29 जनवरी से शाहजमाल ईदगाह के सामने महिलाओं का धरना भी
- 22 फरवरी से शाहजमाल से कुछ महिलाएं ऊपरकोट पर धरने पर बैठीं
- 23 फरवरी को ऊपरकोट पर बवाल, बाबरी मंडी में तारिक जख्मी हुआ
- 13 मार्च को गोली से जख्मी मेडिकल कॉलेज में मृत घोषित किया गया
- 24 मार्च को 56वें दिन शाहजमाल का धरना खत्म कराया जा सका
ये भी हुआ घटित
- एएमयू-जामिया में लाठीचार्ज पर सुप्रीम कोर्ट में यहां के पुलिस अधिकारी तलब
- एएमयू छात्रों की ओर से दायर याचिका पर हाईकार्ट ने मानवाधिकार को जांच दी
- मानवाधिकार आयोग ने की घायल छात्रों को मुआवजे-पुलिस कार्रवाई की संस्तुति
- एएमयू के स्तर से इस पूरे बवाल की मजिस्ट्रेटी जांच की संस्तुति भी की गई थी
ये रही पुलिस कार्रवाई
- 23 मुकदमे सिविल लाइंस थाने में दर्ज, 3 में अंतिम रिपोर्ट
- 3 मुकदमे क्वार्सी थाने में दर्ज, 1 में अंतिम रिपोर्ट दे दी गई
- 8 मुकदमे देहली गेट थाने में दर्ज, 2 में अंतिम रिपोर्ट दी
- 13 मुकदमे कोतवाली थाने में दर्ज, 4 में अंतिम रिपोर्ट दी
47 मुकदमों में 2 मुकदमे मर्ज किए गए थे
एएमयू बवाल में एक मुकदमा सिविल लाइंस में पुलिस ने और दूसरा आरएएफ ने कराया। आरएएफ के मुकदमे में 10 हजार अज्ञात आरोपी बनाए थे, जिसे पुलिस मुकदमे में मर्ज किया। इसी तरह कोतवाली में ऊपरकोट बवाल में दो मुकदमे एक ही घटना में दर्ज हुए। उन दोनों को मर्ज किया गया।
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मानवाधिकार आयोग की संस्तुति पर ये कार्रवाई
2 सिपाही व 2 पीएसीकर्मियों पर विभागीय मिस कंडक्ट की कार्रवाई की गई। छह घायल छात्रों को मुआवजा देना तय हुआ। इनमें गंभीर को 25 व हल्के घायल को 10 हजार जुर्माना दिया गया, जिसमें से तीन छात्र पुरानी चुंगी के नसीर को 25 हजार, कोशांबी कमालपुर के मो.तंजीम को 10 हजार, सुलेमान हॉल के अयाज अंसारी को 10 हजार मुआवजा दिया गया। वहीं एमएम हॉल के तारिक, बीएम हॉल के तबरेज व एसएस साउथ के नदीम ने मुआवजा लेने से इंकार कर दिया।
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