हर घर तिरंगा अभियान की सफलता के लिए हर स्तर पर एड़ी चोटी का जोर लगाया जा रहा है। इसी क्रम में सत्ताधारी भाजपा संगठन को भी प्रत्येक बूथ पर सौ तिरंगा झंडा पहुंचाने का लक्ष्य मिला है। मगर बाजार में तिरंगों के संकट के चलते मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही और तिरंगों को लेकर संगठन में मारामारी के हालात हैं। आलम ये है कि जिन जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदारी दी गई है, वे भी हाथ खड़े करने की स्थिति में हैं। ऐसे में प्रत्येक बूथ पर निर्धारित लक्ष्य के अनुसार झंडे पहुंच पाएंगे या नहीं ये भविष्य तय करेगा।
संगठन स्तर से प्रत्येक बूथ पर 100-100 तिरंगा पहुंचाने के लिए विधायक, सांसद, जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत, ब्लाक व नगर निकाय स्तर के जनप्रतिनिधियों को अलग अलग लक्ष्य दिए गए हैं। निर्देश है कि ये संगठन को निर्धारित लक्ष्य के अनुसार झंडे मुहैया कराएंगे। इसके बाद संगठन द्वारा शक्ति केंद्र व बूथ स्तर तक झंडे पहुंचाए जाएंगे। मगर बाजार में तिरंगे को लेकर मारामारी मची हुई है। पिछले दस दिन से बाजार मांग के अनुसार तिरंगों की आपूर्ति नहीं कर पा रहा। ऐसे में सत्ताधारी जनप्रतिनिधि जैसे तैसे जोड़ तोड़कर लक्ष्य तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन पहुंच नहीं पा रहे हैं । दावा है कि झंडे संगठन तक पहुंचाना शुरू कर दिया है। कुछ खुद ही मोहल्लों व इलाकों में पहुंचकर झंडे वितरित करने की बात कह रहे हैं। ऐसे में संगठन को लक्ष्य के अनुसार झंडे नहीं मिल पा रहे और बूथ स्तर तक जरूरत कूे अनुसार झंडे नहीं पहुंच पा रहे। इसे लेकर संगठन में मारामारी के हालात हैं।
एक तरफ कार्यकर्ता संगठन पर दबाव बना रहा है और दूसरी तरफ जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में कुछ ने तो हाथ खड़ा करना शुरू कर दिया है। इस बारे में भाजपा जिलाध्यक्ष एमएलसी चौ.ऋषिपाल सिंह कहते हैं कि जैसे जैसे झंडे मिलते जा रहे हैं, उन्हें बूथ तक पहुंचाया जा रहा है। चूंकि बाजार से आपूर्ति नहीं हो पा रही, इसलिए एक साथ निर्धारित संख्या में बूथों पर झंडे नहीं पहुंच रहे। जनप्रतिनिधि भी अपने स्तर से प्रयास कर रहे हैं। 13 अगस्त तक लक्ष्य पूरा करने के प्रयास हैं। वहीं भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक सारस्वत भी कहते हैं कि लक्ष्य पूरा करने का प्रयास है। बाजार में झंडा के साथ-साथ उसमें प्रयोग होने वाली डंडियों की भी कमी है।