बाल कवियों ने प्रो बीएस नीहार द्वारा रचित कविताऐं धरती प्यासी मरी और यह रेत हो गई सारी,अन्न उगाए गी कैसे हमको यह बेचारी...; खोल दो खिड़कियाँ,हवाओं को आने दो ! फूल की भाँति खिलो, समय को रूक जाने दो....; शब्द एक शक्ति है, बात है, विचार है, व्यक्ति है। शब्द जीवित संसार है, प्रकृति का प्यार है.....; अणुबम के विस्फोट से, लगी वनों में आग। नदियाँ सारी जल गई, रेत हुए पहाड़.....; प्यार की गंध, ब्रह्माण्ड में फैलाएगी। मेरी कविता मुझे, तुम तक ले जाएगी....; क्यों आती कविता में, तुम्हारे प्यार की गंध ! क्यों आ जाती हो तुम, मेरी कविता में प्रिये... पढ़कर अपना नमन प्रस्तुत किया।
अंत में प्रो नीहार द्वारा रचित झण्डा गान सारे विश्व को दिखा रहा है सत्य, अहिंसा का सपना प्रस्तुत किया गया। प्रधानाचार्या कल्पलता चंद्रहास ने धन्यावाद ज्ञापित किया। बाल कवि सम्मेलन का संचालन शिक्षिका डॉ ममता भारद्वाज और छात्रा सगुन ने किया। इस दौरान रीता शर्मा, डीके गौड़, पूनम कुलश्रेष्ठ, जीतेश वार्ष्णेय, रूचि वार्ष्णेय, कंचन आदि मौजूद थे।