कोरोना से मुक्ति के बाद एक बार फिर अलीगढ़ के खिलौना तमंचे (टॉय गन) की ठांय-ठांय पूरे देश में गूंजेगी। हालांकि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के चलते इस साल भी टॉय गन निर्माता बाजार को लेकर बहुत आश्वस्त नहीं थे। लेकिन स्थिति सामान्य होते ही इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। । सस्ती कीमत के दम पर अलीगढ़ की खिलौना बंदूकों ने चीन की बंदूकों को पछाड़ रखा है। अलीगढ़ में सस्ती खिलौना बंदूकें 60 साल से बन रही हैं। हर बार नए ट्रेंड और डिजाइन का माल बाजार में उतारा जाता है। कभी टॉय-गन में बारूद भरकर उसे खींचकर चलाने वाले उत्पाद से शुरू हुआ यह निर्माण अब अत्याधुनिक डिजाइनों वाले प्लास्टिक टॉय गन में बदल गया है। यहां के बने उत्पाद की देश भर में गूंज है। 5 रुपये तक की खिलौना बंदूकें बाजार को आपूर्ति करने वाले कारोबारियों ने इस क्षेत्र में चीन को पैठ नहीं बनाने दी। यहां के ईगल, बुलेट, गेम जैसे आधा दर्जन बड़े ब्रांड की खिलौना बंदूकों की मांग देशभर के विभिन्न बाजारों में है। कैप गन के बाद टाल कैप गन की बाजार में खासी मांग है।
शिवाकाशी से बारूद निर्माता मंगाते हैं कारतूस का साइज
देश में अलीगढ़ी तमंचे की ख्याति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां बनने वाले तमंचे और टॉय गन में प्रयोग होने वाले कारतूस का साइज व डिजाइन शिवाकाशी के निर्माता मंगाते हैं। ताकि यहां के बने उत्पाद में उनका आतिशबाजी वाला कारतूस फिट हो सके और आसानी से बाजार में बिक सके।
इस बार कच्चे माल की कीमतों ने भी किया परेशान
इसके निर्माता पहले 100 फीसदी लोहे के उत्पाद बनाया करते थे। अब 75 फीसदी खिलौना बंदूकें प्लास्टिक व जस्ते के प्रयोग से बनती हैं। बाकी 25 फीसदी में लोहा व जस्ते का उपयोग होता है। पिछले दिनों में जस्ते की कीमतें 15 फीसदी बढ़ी हैं। स्क्रैप वाला लोहा 40 से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो हो गया। इसी तरह प्लास्टिक दाना भी 80 से 160 रुपये किलो पहुंच गया। साथ में डीजल की कीमतों में इजाफा हुआ। इन तमाम वजहों से ढाई रुपये प्रति नग वाला टॉय गन अब पांच रुपये नग तक पहुंच गई है।
-हमारा उत्पाद देश भर में जाता है। साल में होली व दीपावली को लेकर अधिक ऑर्डर रहते हैं। मगर इस बार कोविड की तीसरी लहर के अंदेशे में ऑर्डर हमने भी कम लिए और बाजार से भी कम आए। इसलिए 40 फीसदी माल कम बना है। मगर अब डिमांड सामान्य से अधिक है और हम आपूर्ति नहीं कर पा रहे। इसका हमें नुकसान झेलना पड़ रहा है।-सुनील पाली, निर्माता टॉय गन
-वैसे तो टॉय गन निर्माण साल भर चलता है। मगर ऑर्डर के अनुसार निर्माता तैयारी करके काम करता है। सामान्य से अधिक माल बनाता है। इस बार माल कम बना है। बाजार की डिमांड हम पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
-शोमांक वार्ष्णेय, थोक विक्रेता टॉय गन
ये तथ्य भी जानें
देश में कुल 80 करो़ड़ रुपये में से 60 करोड़ अकेले अलीगढ़ से देश में आपूर्ति
35छोटी-बड़ी इकाइयां बनाती हैं खिलौना बंदूकें
औसतन 25 कारीगर एक फैक्टरी में करते हैं टॉय गन को तैयार
अलीगढ़ में बनी टॉय गन ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी मौजूद है
ये है दिक्कत
अंत समय में एक साथ कटिंग, डाई बनाने, डिजाइन बनाने आदि के कारीगर एक साथ नहीं हो सकते हैं तैयार।
सोमांक वार्ष्णेय।- फोटो : CITY OFFICE