बेरहमी से हुआ था कत्ल, शरीर पर थे 11 घाव
एडीजीसी जीतू वार्ष्णेय के अनुसार गूलर रोड जैसे इलाके में इस हत्याकांड को दिनदहाड़े बेरहमी से अंजाम दिया गया था। इस दौरान सड़क पर राहगीर आ-जा रहे थे और हमलावर इलाके में घटना को अंजाम देने के साथ दहशत फैला रहे थे। पोस्टमार्टम में जगदीश के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में चाकुओं के कुल 11 निशानों ने यह गवाही दी कि उसका कत्ल बेरहमी से किया गया है।
2013 में शुरू हुई गवाही, 12 गवाह हुए पेश
इस मुकदमे में पहले दिन से वादी पक्ष की पैरवी कर रहे अधिवक्ता संजीव शर्मा ने बताया कि मुकदमे में गवाही वर्ष 2013 में शुरू हुई। अब ट्रायल पूरा होने पर आरोपियों को दोषी करार देकर सजा सुनाई गई। इस मुकदमे में वादिया के अलावा उसकी बहू, जख्मी बेटा व परिवार के तीन लोगों सहित कुल 12 गवाह उनकी ओर से पेश किए गए। वहीं एक गवाह बचाव पक्ष ने पेश किया।
यह है रंजिश, पहले भी एक मुकदमे में सजा
वादी अधिवक्ता संजीव शर्मा के अनुसार दुकान के सामने कचौड़ी की ढकेल लगाने को लेकर काफी समय से दोनों पक्षों में रंजिश पनपी हुई थी। इंद्रपाल के चार बेटे हैं। वह सभी मिलकर दबंगई दिखाते और जगदीश पक्ष पर भारी पड़ जाते थे। इस घटना से दो माह पहले भी मारपीट हुई थी, उसमें भी पुलिस ने जगदीश की बहू आशा का डॉक्टरी परीक्षण कराया था।
इसके अलावा एक मर्तबा जगदीश की पत्नी को पीटते हुए सरेराह कपड़े फाड़कर छेड़खानी तक की गई थी, जिसका मुकदमा इंद्रपाल, उसके बेटे पवन व पूरन पर दर्ज हुआ था। उस मुकदमे में एसीजेएम-9 की अदालत से अकेले पवन को दोषी करार देकर 7 अप्रैल 2016 को दो वर्ष की सजा से दंडित किया था। यह मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद से परिवार की रंजिश बढ़ गई थी और मौका पाकर हत्या को अंजाम दिया गया था। हत्या के मुकदमे में पवन व देवा को हाईकोर्ट तक से जमानत नहीं मिली थी।