टप्पल क्षेत्र के गांव बुलाकीपुर में हाइटेंशन लाइन की चपेट में आने से हुईं तीन मौतों के बाद गुस्साए लोगों द्वारा काटे गए तार सात दिन बाद भी जोड़े नहीं जा सके हैं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पहले गांव में एक हफ्ते से अंधेरा पसरा है। तीन हजार की आबादी इससे परेशान है। ग्रामीणों का कहना है कि तीन लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन लाइन को शिफ्ट नहीं किया जा रहा है, इसलिए वह इसको जोड़ने नहीं देंगे। बिजली विभाग के अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं बनी।
बिजली नहीं होने के कारण गांव के सभी ट्यूबवेल बंद हैं, जिससे धान की फसलों की सिंचाई नहीं हो पा रही है। चार आटा चक्की बंद है, वहां गेहूं की बोरियों के ढेर लग गए हैं। मोबाइल चार्ज नहीं हो पा रहे हैं। इन्वर्टर बोल गए हैं। शाम को बच्चे पढ़ नहीं पा रहे हैं। घरों में श्रीकृष्णजन्माष्टमी की झांकियां नहीं सज पा रही हैं। मंदिरों में भी रोशनी नहीं है। ग्राम प्रधान के पति रवेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया लेकिन आज तक लाइन को आबादी क्षेत्र से हटाया नहीं जा सका है।
तीन मौतों से गुस्से हैं ग्रामीण
अलीगढ़। बीते सोमवार रात गांव के 40 वर्षीय व्यक्ति कालीचरण उर्फ कालू पुत्र महीपाल की हाइटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। इससे गुस्साए लोगों ने तार काट दिए थे और लाइन को हटाने की मांग करते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था। एसडीएम व एसडीओ के आश्वासन के बाद ही अंतिम संस्कार हुआ था। इस घटना से पहले गांव के संजय पुत्र परमाल व अरुण पुत्र रमेश की भी हाइटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई थी।
बिजली की लाइन है दशकों पुरानी
गांव से गुजरने वाली बिजली की 11 हजार केवी की लाइन दशकों पुरानी है। 30 साल पहले इस बिजली की लाइन के नीचे आबादी बसना शुरू हो गई। लाइन के ठीक नीचे रहने वाले 20 से 25 परिवार ज्यादा प्रभावित हैं।
बिजली विभाग के एक्सईएन सेठपाल ने बताया कि गांव से गुजर रही हाइटेंशन लाइन दशकों पुरानी है, जिसके नीचे लोगों ने मकान बना लिए हैं। लाइन को हटाना प्रस्तावित है। जो तार काटे गए हैं उन्हें जोड़ दिया जाएगा।
बिजली के तार में करंट उतरने से गांव के तीन लोगों की मौत हो जाना बड़ी बात है। हम थोड़ी समस्या झेल लेंगे, लेकिन लाइन वहां से हटनी चाहिए।
नरेंद्र प्रताप सिंह, बुलाकीपुर।
करंट से मौत होने की घटना के बाद अफसर आश्वासन देकर चले जाते हैं, लेकिन होता कुछ नहीं है। यह अब नहीं चल पाएगा। लाइन हटवानी पड़ेगी।
प्रेमपाल सिंह, बुलाकीपुर।