मैरिस रोड स्थित दुर्गाबाड़ी में प्रसिद्ध दुर्गा पूजा एक अक्तूबर से पांच अक्तूबर तक होगी। यहां दुर्गा उत्सव बंगाल के गांव की तरह मनाया जाएगा। इसको लेकर दुर्गाबाड़ी में रंग-रोगन कने के साथ ही पांडाल को आकर्षक तरीके से सजाया जा रहा है। गाजियाबाद में बंगाली कलाकार द्वारा तैयार मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं तैयार होकर सोमवार को अलीगढ़ आ गईं हैं। मां दुर्गा के महिषासुर का वध करने के बाद मायके आगमन को लेकर बंगाली समाज से जुड़े लोग इसे दुर्गा उत्सव के रूप में मनाते हैं।
छह दिन तक बंगाली रीति -रिवाजों से दुर्गा पूजा का आयोजन होगा और पांडालों में अनुुष्ठान होंगे। दुर्गाबाड़ी में यह आयोजन करीब 62 सालों से मनाया जा रहा है। दो साल तक कोरोना के चलते यह आयोजन भव्यता से नहीं हो सका था। इस बार श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन समिति के अध्यक्ष चंदन चटर्जी ने बताया कि एक अक्तूबर को मां दुर्गा प्रतिमा के अनावरण के साथ दुर्गा उत्सव की शुरुआत होगी। जहां, प्रतिदिन सुबह से पूजन और रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पूजा के दौरान बंगाल के बैंड (ढांकी) की आवाज से पांडाल गूंजेंगा। सप्तमी पर पूजा, अंजली, प्रसाद, भोग वितरण, रात आठ बजे से डांस प्रतियोगिता होगी। जिसमें पांच साल से लेकर 15 साल तक के बच्चे भाग ले सकेंगे। तीन अक्तूबर को अष्टमी पर संगीत कार्यक्रम का आयोजन रात आठ बजे से होगा। चार अक्तूबर को नवमी पर शाम को कोलकाता से आए कलाकारों की गीत-संगीत, नाट्य और बंग लोक संस्कृति पर आधारित विभिन्न प्रस्तुतियां होंगी। पांच अक्तूबर को दशमी पर सिंदूर खेला, दुर्गा विदाई, जुलूस दुर्गाबाड़ी से केलानगर चौराहा, रामघाट, क्वार्सी होते हुए हरदुआगंज स्थित नहर में दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन होगा।
दुर्गा पूजा को लेकर इस बार भी जोरदार तैयारियां की गई हैं। बंगाल की तर्ज पर यहां पर दुर्गा पूजा होगी। जिसमें बंगाली समाज से जुड़े लोग भाग लेकर मां दुर्गा का गुणगान करेंगे।
- श्वेता चटर्जी, आयोजन समिति सदस्य
पूरे नवरात्र माता रानी की पूजा-अर्चना और अनुष्ठान के साथ मां दुर्गे का गुणगान होगा। इस दौरान भव्य आयोजन होंगे। इन कार्यक्रमों में शहर भर के बंगाली समाज से जुड़े लोग बड़ी संख्या में भाग लेते हैं।
- निर्मल्य चटर्जी, दुर्गाबाड़ी महंत