जमीन की खरीद-फरोख्त को लेकर सर्किल रेट बढ़ने से पहले ही इस साल बैनामों की संख्या में और बढ़ोतरी होने की संभावना है। सबसे अधिक बैनामे कोल व खैर तहसील में हो रहे हैं। जिले की अधिकांश विकास परियोजनाएं खैर रोड पर होने के कारण कोल और खैर तहसीलों के गांव तथा सड़क किनारे जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। एक अगस्त से नए सर्किल रेटों पर ही जमीन की खरीद एवं फरोख्त होगी।
हालांकि प्रशासनिक स्तर से संकेत मिल रहे है कि सर्किल रेट में इस बार वृद्धि नहीं की जाएगी। इसके बाद भी सर्किल रेट बढ़ने की आशंका में बैनामों की संख्या बढ़ने लगी है। इसी दृष्टि से इन दिनों लोग तेजी से जमीनों के बैनामा करा रहे हैं। स्थिति यह है कि मई के महीने में दो गुना से अधिक बैनामा हो गए हैं। बैनामा बढ़ने में सबसे अधिक संख्या खैर एवं कोल तहसील की है। इसके बाद गभाना, अतरौली एवं खैर है। पिछले साल मई के महीने में 2299 बैनामा हुए थे। इस साल सर्किल रेट बढ़ने की आहट पर दोगुने से अधिक 5176 बैनामे हो चुके हैं।
इनमें तहसील खैर के उपनिबंधक कार्यालय में 462, कोल में 375, गभाना 236, अतरौली 342, इगलास में 221 बैनामा हो चुके हैं। इनमें सर्वाधिक बैनामें कोल तहसील के कस्बा लोधा, मूसेपुर, जिरौली डोर के आसपास राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्व विद्यालय, लोधा करसुआ, मूसेपुर, जिरौली से सटे हुए गांवों की जमीन के दामों में ज्यादा वृद्धि हो गई है। गांव ल्हौसरा विसावन में ट्रांसपोर्ट नगर प्रस्तावित है। इनसे सटे गांव हरदासपुर, वाजीदपुर, नांदा, रुस्तमपुर, ताजपुर रसूलपुर की जमीनों के रेट में वृद्धि हो गई है। इस कारण ज्यादा बैनामा हो रहे हैं। इसी तरह गांव करसुआ की जमीन में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना के बाद से यहां की जमीन काफी महंगी हो गई है। जीटी रोड, हाईवे, यमुना एक्सप्रेस वे समेत सभी राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, जिला मार्ग और उनके लिंक मार्ग शामिल हैं।
अब तहसीलों में बैनामा की संख्या बढ़ रही है। इस कारण राजस्व में भी बढ़ोतरी हुई है। सर्किल रेट बढ़ाने के बारे में सुझाव एवं आपत्तियां भी मांगी गई हैं। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी आपत्तियों का निस्तारण कर नई रेट लिस्ट लागू कर सकती है।
-ज्ञानेंद्र कुमार, एआईजी स्टांप