दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय में एक अलग समस्या देखने को मिली। यहां मरीजों को विशिष्ट के साथ सामान्य दवाओं के लिए बाहर के मेडिकल स्टोर पर भागना पड़ रहा है।
डाक्टरों की कमी से जूझ रहे इस अस्पताल में मरीजों को पहले ही सही इलाज नहीं मिल रहा था। अब दवाएं भी बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में जिन दवाओं की कमी है, उसके लिए डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे हैं। हर महीने लगभग 90 हजार मरीजों के औसत वाले इस अस्पताल में लीवर और प्रोस्टेट के सिरप और दवाएं नहीं हैं। इसके साथ पेन किलर, आई ड्रॉप, कटने, जलने और दर्द की क्रीम, गैस, शुगर, ब्लड प्रेशर और सांस जैसी बीमारियों के लिए मरीजों को बाहर के दवा विक्रेताओं से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
अस्पताल में शासनादेश के अनुसार लगभग 289 दवाओं की उपलब्धता होनी चाहिए, लेकिन अस्पताल में लगभग 250 दवाएं उपलब्ध हैं। बाकी दवाओं की ड्रग वेयर हाउस से ही आपूर्ति नहीं है।
मरीजों का कहना है कि डॉक्टरों द्वारा लिखी जा रहीं दवाएं काउंटर पर नहीं मिल रहीं। आधी दवाएं यहां से मिलती हैं तो आधी दवाएं बाहर से लेनी पड़ती हैं।
33 के मुकाबले सिर्फ 15 ही चिकित्सक
33 चिकित्सकों की जरूरत वाले इस अस्पताल में केवल 15 चिकित्सक ही मौजूद हैं। रेडियोलॉजिस्ट की कमी से अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन जैसी जांचों के लिए प्राइवेट जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। वहां इनके लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ती है। अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सकों की तैनाती के लिए प्रशासन को कई बार पत्र लिखा गया है। इसके बावजूद तैनाती नहीं हो पाई है।
सांस और खांसी के दवा लेने आए रामशंकर ने बताया, डॉक्टर ने सांस और एंटी-बायोटिक दवा बाहर से लिखी हैं।
सुनीता ने बताया कि डॉक्टरों ने गैस के लिए बाहर की दवा लिखी हैं।
अस्पताल में अधिकांश दवाएं उपलब्ध हैं। इक्का-दुक्का दवा के लिए ही मरीजों को बाहर की दवा लिखी जाती है। डॉक्टरों को बाहर की दवा न लिखने की सख्त हिदायत दी गई है। जिन दवाओं की कमी है, उसे जल्द ही दूर कराया जाएगा।
-अनुपम भास्कर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक