डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने स्वरोजगार के लिए एक युवक के बैंक ऑफ महाराष्ट्र में ऋण के लिए आवेदन करने पर भी 10 माह बाद भी ऋण मंजूर न करने के मामले को गंभीरता से लेते हुए जोनल हेड को जांच व कार्रवाई करने को कहा है। डीएम ने कहा है कि 15 दिन में कोई कार्रवाई नहीं की गई तो यह माना जाएगा कि भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए ऐसा किया गया है। इस बारे में संबंधित के खिलाफ थाने में सुसंगत धाराओं में मुकदमा भी दर्ज होगा।
तहसील अतरौली क्षेत्र के बरला के गांव अलहदादपुर निवासी मोहन हरीमोहन ने 26 अगस्त को डीएम से मिलकर शिकायत की थी। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत आटा मिल के लिए जिला उद्योग केंद्र से 25 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। स्वीकृति मिलने के बाद भी बैंक ऑफ महाराष्ट्र में सभी दस्तावेज जमा कराने और औपचारिकताएं पूरी कराने के बाद भी उनसे ऋण देने के नाम पर अनुचित धन की मांग की गई। पीड़ित ने डीएम को बताया कि बेरोजगार होने पर वह रोजगार करने में विफल हो रहा है।
बैंक अधिकारी सरकार की योजनाओं को अपनी मंशा पूर्ण करने की नीयत से पलीता लगा रहे हैं। इस शिकायत पर डीएम ने संबंधित बैंक शाखा के प्रबंधक को सोमवार को कार्यालय में तलब किया था। शाखा प्रबंधक प्रतीक गुप्ता ने बताया कि वह एक महीने पहले ही शाखा में आए हैं। बताया गया है कि आवेदक के ऋण के लिए किए गए आवेदन को निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बैंक शाखा से आवेदक के घर की दूरी 25 किलोमीटर है। ऐसे में बैंक नियमों के चलते ऋण नहीं दिया जा सकता है। डीएम के अनुसार वर्ष 2021 से लंबित आवेदन को करीब 10 माह बाद निरस्त करना यह साबित करता है कि बैंक में आवेदक से धन की आंकाक्षा की गई होगी। 10 माह तक आवेदन पर निर्णय नहीं लिया गया। इतना ही नहीं आवेदन भी पोर्टल पर अभी तक लंबित बना हुआ है। इस मामले में नवागत शाखा प्रबंधक ने भी इस प्रकरण को हल करने का प्रयास नहीं किया है। ऐसे में उनकी भूमिका भी संदिग्ध है। उन्होंने बैंक के जोनल हेड को 15 दिनों में रिपोर्ट प्रेषित करने को कहा है।