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हां, सिपाही की ‘शह’ पर चल रहा था वसूली गैंग

Wed, 08 May 2019 01:50 AM IST
राजेश सिंह क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़
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अपहरण कांड का मास्टर माइंड दीपांशु। - फोटो : Rupesh
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लोधा के गांव हरिदासपुर से मामा-भांजे के अपहरण कांड का मास्टर माइंड गैंग सरगना दीपांशु उर्फ डॉलर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। गैंग के दो सदस्यों की गिरफ्तारी के वक्त वह लोको कॉलोनी से चलती ट्रेन में चढ़कर भाग गया था और कुछ आगे उतरकर उसने हर बार की तरह एएमयू में ही शरण पाई थी।
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यहां से निकलकर बदायूं भागने के समय पुलिस ने उसे दबोच लिया। पूछताछ में उसने यह बात स्वीकारी है कि वह उसी सिपाही की शह पर ही काम कर रहे थे, जिसके फोन उसके गिरफ्तार साथी रजत के मोबाइल पर आ रहे थे। उसी के बताए जाने पर मामा-भांजे को उठाया था। बात 20-20 हजार रुपये लेकर छोड़ने की थी, मगर लालच मन में आने पर बात 2-2 लाख तक पहुंच गई।

गिरफ्तारी के बाद रजत ने सिपाही की थानेदार से बात भी कराई थी, मगर चूंकि मसला हाईप्रोफाइल हो गया, इसलिए मैनेज नहीं हो पाया। उसने इस वारदात में अपने दो अन्य साथियों के नाम भी उजागर किए, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीम प्रयासरत हैं। लोधा अपहरण कांड का मास्टर माइंड भेजा गया जेल।शनिवार शाम हरिदासपुर से किसान जितेंद्र सिंह के बड़े बेटे प्रशांत उर्फ  पंकज (25) व उसके नगला मसानी निवासी मामा मनोज पुत्र गोपाल (30) को कार सवारों ने अगवा किया था।
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कुछ ही घंटे में पुलिस घेराबंदी पर लोको कॉलोनी में दोनों अपहृत बरामद कर दो बदमाश दबोच लिए। इस दौरान गैंग सरगना दीपांशु उर्फ डॉलर निवासी लोको कॉलोनी सिविल लाइंस ट्रेन में सवार होकर बच निकला था। इससे पहले एक साथी कुनाल मौके से मनोज की स्कूटी लेकर एएमयू के एसएस नार्थ हॉल पहुंच गया था। उसी दिन से पुलिस दीपांशु व कुनाल को तलाश रही थी।

रविवार रात भी दीपांशु की लोकेशन एएमयू में थी। इस खबर पर पुलिस ने दबिश भी दी थी, मगर वह बच गया था। सोमवार देर रात पुलिस को खबर लगी कि वह एएमयू से निकलकर कहीं रोडवेज बस में सवार होकर बदायूं जाने की तैयारी में है। सूचना पर सीओ तृतीय अनिल समानिया, सर्विलांस प्रभारी अभय शर्मा की टीम ने उसे घेराबंदी कर दबोच लिया। 

 पुलिस सूत्रों के अनुसार पूछताछ में दीपांशु ने स्वीकारा कि अपहरण की वारदात में उनके साथ उसके दो और साथी अनिल व आकाश शामिल थे। इनमें से अनिल अपनी बुलेट पर था, जबकि आकाश कुनाल के साथ स्कूटी लेकर निकल गया था। पुलिस पूछताछ में उसने स्वीकारा कि ट्रेन में सवार होने के बाद वह कुछ आगे उतर गया और सीधे एएमयू के एसएस नार्थ पहुंचा था। वह अब तक उस सिपाही की मुखबिरी करते रहे हैं, जिसका नाम उसके साथी रजत ने लिया।

उसके कहने पर पूर्व में भी इसी तरह लोगों को उठाते रहे हैं। इस बार भी उसी सिपाही ने मनोज के विषय में बताया था कि वह गांजे का तस्कर है और उठाने व हड़काने पर रुपये दे देगा। उन्हें रुपयों की जरूरत थी और मंशा थी कि बीस-बीस हजार रुपये वसूलकर छोड़ देंगे। परिजन तैयार भी हो गए थे। मगर मन में लालच आ गया और दो-दो लाख की डिमांड कर दी। वह उसी सिपाही के पास ही इन दोनों को ले जाने वाले थे, मगर पुलिस की घेराबंदी पर प्लान चौपट हो गया। सिपाही रजत से मोबाइल पर लगातार संपर्क में था।

क्वार्सी थाने के मुकदमे में गिरफ्तारी,  लोधा पुलिस लेगी रिमांड
सीओ तृतीय अनिल समानिया के अनुसार डॉलर पेशेवर अपराधी है। सिविल लाइंस व क्वार्सी के कई मुकदमों में आरोपी है। वर्तमान में वह लोधा अपहरण के अलावा क्वार्सी थाने के वर्ष 2018 के 307 के एक मुकदमे में वांछित था।

जिसमें अदालत से कुर्की नोटिस भी जारी थे। क्वार्सी के मुकदमे में उसकी गिरफ्तारी लिखा पढ़ी कर जेल भेजा गया है। वहीं उसके द्वारा बताए गए अन्य साथियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। इधर, एसओ लोधा के अनुसार अब वह उसे अपहरण कांड में रिमांड पर लेंगे।

सिपाही के खिलाफ अदालत में भी  दायर है याचिका
इसी तरह के प्रकरण में सिपाही के दामन पर और भी छींटे हैं। जमालपुर नवी नगर के मो. असलम की ओर से एक याचिका अदालत में दायर की गई है, जिसमें सिपाही व उसके साथी दूसरे सिपाही पर आरोप हैं कि उसने अपने एक दोस्त को व्यापार के वास्ते रुपये दिए थे। मगर न तो व्यापार में साझा हुआ और न रुपये मिले। जब रुपये मांगे तो दोस्त ने इन एसओजी सिपाहियों की धमकी दी। 11 अप्रैल की रात यह सिपाही उसे मेडिकल कॉलेज की इमजरेंसी के गेट से उठा ले गए। रात भर थाना सिविल लाइंस में रखा और मारपीट की।

अधिकारियों की धमकी देकर कहा कि अगर एक लाख रुपये नहीं दिए तो एनडीपीएस में जेल जाओगे। इस पर उसने पचास हजार रुपये की व्यवस्था करके दी, तब जाकर उसे छोड़ा गया। इस मामले में अदालत स्तर से मामले में आख्यात सिविल लाइंस पुलिस से तलब की जा रही है। मगर पुलिस रिपोर्ट नहीं भेज रही। इस मामले में भी सिपाही के साथ अपहरण कांड में शामिल लोग शामिल होना बताया गया है।

पूछताछ में दीपांशु ने महानगर पुलिस में ही तैनात सिपाही के विषय में यह जिक्र किया है कि उसके लिए मुखबिरी करते थे। उस दिन भी सिपाही उनके संपर्क में था। मगर उसकी बातों से लग रहा है कि मुखबिरी करने की आड़ में यह अपराध करने लगे। सिपाही की भूमिका की जांच होगी, उसके आधार पर अधिकारी निर्णय लेंगे। 
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- अनिल समानिया, सीओ तृतीय
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