महानगर के बहुचर्चित डॉ.मन्नान वासनवाला अपहरण कांड में मुख्य आरोपी शहमुद्दीन को मार गिराने वाली पुलिस टीम को बेशक इस साल पुलिस परेड में पुलिस पद से सम्मानित किया गया। मगर हाईकोर्ट की डबल बैंच ने इस अपहरण में शामिल शहमुद्दीन के चार साथियों को इस आरोप से बरी करते हुए उनकी उम्रकैद की सजा भी रोक दी। सत्र न्यायालय से उम्रकैद होने के बाद आरोपियों की अपील की सुनवाई के समय हाईकोर्ट के समक्ष अभियोजन पक्ष 9 बिंदुओं पर जवाब नहीं दे सका और अदालत ने अपने लंबे-चौड़े आदेश में उन 9 बिंदुओं का उल्लेख करते हुए चारों आरोपियों को इस आरोप से बरी कर दिया। अब इन चारों की जल्द रिहाई होगी।
सरसैयद नगर इलाके में रहने वाले जेएन मेडिकल कॉलेज के मशहूर डॉक्टर मन्नान वासनवाला के अपहरण के बाद उनके परिवार से 40 लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। तत्कालीन एसएसपी अखिल कुमार ने एसटीएफ की मदद से मामले में बेहद सटीक मुखबिरी पर चालाकी से डॉक्टर को सकुशल बरामद करते हुए शहमुद्दीन को मुठभेड़ में ढेर किया था और पांच अन्य आरोपी वसीम उर्फ बंटी, भूरा उर्फ भालू, शमशाद, अलीमुद्दीन, परवेज को गिरफ्तार किया था। सत्र न्यायालय ने साक्ष्यों व गवाही के आधार पर परवेज को छोड़ सभी आरोपियों को उम्रकैद व दस-दस हजार जुर्माने से दंडित किया। इस आदेश के खिलाफ अपील हुई। जहां बचाव पक्ष की दलीलों में सबसे अहम दलील यह रही कि सत्र न्यायालय में डॉ.मन्नान शमशाद व अलीमुद्दीन को पहचान पाने में नाकाम रहे।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता नीरज चौहान के अनुसार इस दलील को सत्र न्यायालय में नजरंदाज किया गया। मगर हाईकोर्ट में इस दलील सहित 9 अन्य बिंदुओं पर अभियोजन से जवाब मांगे, जिनमें अपराधी को नाम से न पहचान पाने, अपहरण में प्रयुक्त लाल रंग की गाड़ी बरामद न होने आदि प्रमुख रहे।
मगर अभियोजन इनके जवाब दाखिल न कर सके। इससे साफ है कि पुलिस की विवेचक की केश डायरी कमजोर रही और चारों आरोपियों को हाईकोर्ट की डबल बैंच ने बरी कर दिया। बता दें कि इसी अपहरण कांड में एन्काउंटर पर इसी साल पुलिस परेडर में उस समय शामिल रही टीम को पुलिस पदक से सम्मानित किया गया है।