मुठभेड में मारे गए बेटे बबलू को मुखाअग्नि देने पहुंची मां गिरिराज देवी।
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मुठभेड़ में मारे गए बावरिया अपराधी बबलू गंजा को उसकी बुजुर्ग मां गिर्राज देवी ने शनिवार देर रात यहां नुमाइश मैदान के श्मशान गृह में मुखाग्नि गदी। हालांकि बेटे की मौत का गम उसके चेहरे पर साफ झलक रहा था, मगर उसे पता था कि बेटे का भविष्य क्या है। बातचीत में उसने यही कहा कि सौतेले भाई ने बबलू को अपराध की राह दिखाई थी और उसे उसके कर्मों की सजा मिली है।
बल्लभगढ़ से देर रात जब गिर्राज देवी यहां पहुंची तो पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम गृह में बबलू का शव दिखाया, जिसे देखते ही मां ने पहचान लिया। इस दौरान एक अधिवक्ता का मुंशी महिला के साथ था। इसके बाद शव साथ ले जाने की बात हुई तो महिला ने शव के यहीं अंतिम संस्कार की बात स्वीकार ली और शव को नुमाइश मैदान ले जाया गया।
जहां मां ने ही उसे मुखाग्नि दी। महिला ने बताया कि उसके पति रामपाल ने दो शादियां की थीं। पहली बीवी की मौत के बाद उससे शादी की। पहली पत्नी से एक बेटा जगदीश है, जिस पर 22 के करीब मुकदमे हैं। पिता भी अपराधी है। वह जेल में है। पिता व सौतेले भाई की संगत ने इसे भी अपराधी बना दिया था। गिर्राज देवी पर पांच बच्चे हैं, जिनमें यह तीसरे नंबर का था।
इससे बड़ा बेटा व बेटी है। बड़े बेटे का कोई क्राइम रिकार्ड नहीं है। मां के अनुसार वह एक महीने पहले आया था। उसके बाद उसकी कोई खबर नहीं मिली। शनिवार दोपहर एक सिपाही पहुंचा, उसने मौत की खबर दी। अब क्या कह सकते हैं, वह मारा गया। उसने जैसा किया, वैसी सजा मिली है।