महानगर के रामघाट रोड क्वार्सी चुंगी पर रहने वाले प्रधान पुत्र राज्य स्तरीय शूटर की बृहस्पतिवार सुबह घर पर ही संदिग्ध हालत में गोली लगने से मौत हो गई। आनन-फानन परिजन उसे गंभीर हालत में जेएन मेडिकल कॉलेज ले गए। जहां कुछ घंटे के इलाज के बाद उसने दम तोड़ दिया।
परिजनों ने घटना का कारण रिवाल्वर साफ करते समय गोली चलना बताया। इस पर पुलिस ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया। फिर भी पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मूलरूप से हरदुआगंज के गांव गढ़िया माछुआ के ग्राम प्रधान जीतपाल सिंह परिवार के साथ लंबे समय से क्वार्सी चुंगी पर रहते हैं। परिवार में पत्नी पप्पी देवी के अलावा बड़ा बेटा शेखर, छोटा लोकेश सिंह (17), बेटी दीपाली, मोना थे। दीपाली से बड़ा भाई लोकेश 11वीं का छात्र था और निशानेबाजी भी करता था। वह कई राज्यस्तरीय प्रतियोगिताओं में भी वह शामिल हो चुका था।
परिजनों ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह वह मकान की ऊपरी मंजिल पर पिता की लाइसेंसी रिवाल्वर की नाल साफ कर रहा था, तभी अचानक गोली चल गई, जो उसके पेट में जा लगी। पिता उस समय गांव में थे। गोली की आवाज सुनकर परिजन ऊपर भागे। देखा तो लोकेश लहूलुहान पड़ा था। तत्काल उसे निजी अस्पताल लाया गया, यहां से उसे मेडिकल रेफर कर दिया गया।
खबर पर पिता जीतपाल भी आ गए। मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर उसे बचाने की तमाम कोशिश की, लेकिन उसने दम तोड़ दिया। बेटे की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। हालांकि शुरू में पुलिस को पारिवारिक विवाद में खुदकुशी की सूचना मिली थी। मगर मेडिकल चौकी स्टाफ ने वहां जानकारी की तो इसे एक्सीडेंट करार दिया गया।