पांच हजार के इनामी रामू के भाई श्यामू की पुलिस की एसओजी टीम हिरासत में मौत के मामले में टीम को फिर से तगड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है और साथ ही निचली अदालत की कार्रवाई पर लगा स्थगनादेश भी हटा दिया है। इस तरह पुलिस टीम के सामने फिर बड़ी परेशानी खड़ी हो गई है।
वाकया 15 अप्रैल 2012 का है, जब तत्कालीन एसओजी टीम ने पनिहावर गभाना निवासी पांच हजार के इनामी रामू की तलाश में रुस्तमपुर क्वार्सी में दबिश दी। जहां रामू अपने हमशक्ल भाई श्यामू संग मिला। टीम ने चेहरे के फेर में दोनों को हिरासत में लिया। मकसद बाद में रामू की पहचान होने पर एक छोड़ने का था। मगर पुलिस हिरासत में श्यामू की क्वार्सी थाने में मौत हो गई।
मामले में रामू के दूसरे बड़े भाई मनवीर ने पूरी टीम पर मुकदमा दर्ज कराया। आरोप जहर देकर मारने का लगा। हालांकि टीम का कहना था कि तलाशी के दौरान उसने खुद जहर खाया था। बिसरा से लेकर अन्य तरह की जांचों के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी। इस एफआर को सीजेएम ने अस्वीकार कर पूरी टीम को तलब कर लिया।
सीजेएम के आदेश के खिलाफ रिवीजन दायर हुआ। सत्र न्यायालय से रिवीजन भी खारिज हो गया। सत्र न्यायालय के आदेश के खिलाफ टीम हाईकोर्ट गई। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकारते हुए उस समय निचली अदालत की कार्रवाई याचिका की सुनवाई होने तक स्थगित कर दी। मगर अब आकर हाईकोर्ट के न्यायाधीश रमेश सिन्हा की अदालत ने इस याचिका को इस तर्क के साथ खारिज कर दिया कि पुलिस के विभिन्न अंगों ने अपने बचाव में मुकदमा एफआर किया है। याचिका खारिज करते हुए स्थगनादेश भी हटा लिया है। ऐसे में टीम के सामने दो रास्ते हैं। या तो टीम निचली अदालत के समक्ष हाजिर होगी। या फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगी।