जेल में भला कौन रहना चाहता है, वो भी जब पता चल जाए कि सजा पूरी हो गई है। मगर, एक ऐसा ही मामला सामने आया है। सजा पूरी होने पर तीन दिन के बाद कैदी को रिहाई का आदेश मिल सका। हालांकि, वह तीन दिन पहले रिहा हो गया था। गांधी जयंती के उपलक्ष्य में 50 फीसदी सजा काट चुके 14 कैदी चिह्नित किए गए थे।
कैदियों की रिहाई जमानत दाखिल न होने से रुकी हुई है। एक की रिहाई अभी अटकी है। एक कैदी रिहा हो चुका है। वहीं, दहेज हत्या में सजा काट रही अख्तरी बेगम पत्नी बन्ने खां निवासी तुर्कमानगेट हड्डी गोदाम बाईपास दया याचिका के आधार पर रिहा हो गईं। हाथरस में सिकंदराराऊ क्षेत्र के गांव नगला महारी निवासी मुलायम सिंह और इनकी पत्नी ओमवती पूर्व में रिहा हो चुकी है। अब गभाना के लाखा बाजार निवासी कलुआ पुत्र बाबूलाल को रिहा कर दिया गया। दहेज उत्पीड़न की सजा काट रहा आलमबाग निवासी शाहिद 12 अक्तूबर को सजा पूरी कर रिहा हो चुका है। 15 अक्तूबर को इसके रिहाई के आदेश मिले हैं। इसके अलावा चोरी के मामले में कैद नगला मानसिंह गांधीपार्क निवासी मनोज उर्फ भेडिय़ा पुत्र रामप्रकाश के भी आदेश आ गए, लेकिन अन्य मुकदमे के चलते वह रिहा नहीं हो सका।