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नोटबंदी का खौफ दिखा सिपाही ने लूटे दो लाख

Sun, 25 Dec 2016 01:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
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फाइल फोटो - फोटो : social media
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महानगर के सासनी गेट इलाके में शनिवार को दिनदहाड़े गल्ला व्यापारी को नोटबंदी का खौफ दिखाकर सिपाही ने दो लाख रुपये लूट लिए। घटना को अंजाम देने से पहले सिपाही ने साजिश के तहत इस व्यापारी को फोन पर नोट बदलवाने के लिए सिंघल धर्मकांटे के पास बुलाया। फिर उससे डरा धमकाकर रुपये छीनकर भगा दिया। पीड़ित ने इस संबंध में एसएसपी को सूचना दी तो जांच एसपी सिटी को सौंप दी है।
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धनीपुर गल्ला मंडी के व्यापारी सचिन कुमार के अनुसार उनके एक परिचित युवक ने उनसे 10-12 प्रतिशत पर पुराने नोटों के बदले में नए नोट मांगे थे। व्यापारी शनिवार की दोपहर दो-दो हजार रुपये की दो लाख की नकदी लेकर हाथरस सामान खरीदने के लिए निकले थे। तभी उनके पास परिचित युवक का फोन आया। उसे नोट बदली के लिए आगरा रोड स्थित सासनी गेट पर सिंघल धर्मकांटे पर बुलाया। व्यापारी वहां पहुंचे और युवक का इंतजार करने लगे। परिचित युवक तो नहीं आया, लेकिन वहां अन्य युवक आया। वह व्यापारी को कमीशन पर नोट बदली को लेकर हड़काने लगा। उन्होंने विरोध किया तो युवक ने अपना पुलिस का परिचय पत्र दिखाया।
यह देख वह डर गए। इसके बाद सिपाही उन्हें गली में ट्रांसपोर्ट के पास ले गया और हाथापाई कर दो लाख रुपये की नकदी लूट ली।
डर के मारे व्यापारी शोर भी नहीं मचा पाया। व्यापारी ने बताया कि सिपाही जब रुपये लूटकर जा रहा था तभी स्थानीय एक व्यापारी भी आए। उन्होंने भी उसे डरा दिया और वहां से भाग जाने को कहा। उन्होंने एसएसपी राजेश पांडेय को सूचना दी। एसएसपी ने मामले की जांच एसपी सिटी को सौंपी है। जिस सिपाही का नाम बताया गया है, वह कुछ दिन पहले तक सासनी गेट थाने में तैनात था। मगर अब वह एक्सप्रेस वे के लिए बन रही पुलिस सुरक्षा एजेंसी में ट्रांसफर कर दिया गया है। उसका फोन भी बंद जा रहा है।
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तहरीर पहुंचने पर सिपाही ने लौटाए रुपये
अलीगढ़। सिपाही द्वारा दो लाख रुपये लूटे जाने के मामले में एसपी सिटी स्तर से हुई जांच के बाद देर रात दो तहरीरें सासनी गेट थाने में पहुंच गईं। इनमें एक तहरीर में लूट व दूसरी में मारपीट का आरोप था। तब जाकर सिपाही को खुद पर संकट के बादल मंडराते दिखे तो आनन-फानन रुपये वापसी की प्रक्रिया अपनाई गई है। थाना स्तर से ही मामले को मैनेज करने के संकेत मिले हैं। सूत्र बताते हैं कि देर रात रुपये वापस करने पर ही पीड़ित पक्ष के स्तर से चुप्पी साधी जा रही है।
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