एक बार फिर खाकी की ‘दागदार’ करतूत सामने आई है। ग्वालियर पुलिस सिपाही की हत्या के मामले में कुख्यात हरेंद्र राणा गिरोह के जिस शातिर को तलाश रही थी, उसे थाना सासनी गेट के वरिष्ठ उपनिरीक्षक ने हत्या के तीन दिन बाद थाना क्षेत्र से तमंचा रखने में गिरफ्तार दर्शा कर जेल भेज दिया। इस कार्रवाई के बाद यह दरोगा जम्मू चला गया। इधर, ग्वालियर पुलिस को जब इसका पता चला तो पूरा मामला एसएसपी के सामने पहुंचा। एसएसपी ने प्रकरण की जांच एसपी सिटी को दी है।
ग्वालियर का कुख्यात हरेंद्र राणा और अलीगढ़ का कुख्यात सोनू गौतम और इनका गैंग एक दूसरे के लिए काम करते हैं। पांच जून को टोटा की बजरिया ग्वालियर के एक सिपाही समीर धींगरा की हत्या हुई। इसमें जब वहां की पुलिस ने छानबीन की तो यह बात सामने आई कि हरेंद्र राणा ग्रुप इस हत्या में शामिल है। ग्वालियर पुलिस ने जब हत्या के तार जोड़े और हरेंद्र के साथी दीपक व भाई सत्यवीर की तलाश की। गिरोह के सक्रि य सदस्य सत्यवीर व बेताल को हिरासत में लेकर पूछताछ की तो यह बात सामने आई कि सिपाही समीर व हरेंद्र राणा गैंग के सदस्य जगमोहन में प्लॉट का विवाद था। हत्या के दिन से ही जगमोहन गायब था।
उसके बाद जगमोहन ने अपने बचाव के लिए ताना बाना बुना। इसी के चलते थाना सासनी गेट के एसएसआई रविंद्र बहादुर सिंह ने उसे मथुरा बाईपास के पुल के नीचे से तमंचे सहित गिरफ्तार दर्शा दिया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया और ग्वालियर पुलिस को उस दिन इसकी भनक भी नहीं लगी। कई दिन बाद जब ग्वालियर पुलिस को इसकी जानकारी हुई तो वहां के पुलिस अधिकारियों ने स्थानीय पुलिस अधिकारियों को बताया कि जो शातिर तमंचे में जेल भेजा गया है। उसकी तो उन्हें सिपाही की हत्या के मामले में तलाश है। पूरी स्थिति से स्पष्ट था कि जगमोहन को सेटिंग के चलते तमंचे में गिरफ्तार दर्शा कर जेल भेजा गया है।
मामले में दरोगा की भूमिका संदिग्ध मानते हुए एसएसपी ने एसपी सिटी को जांच सौंपी है। फिलहाल दरोगा सरकारी कार्य से जम्मू गया है और उसका निलंबन तय माना जा रहा है। वहीं जेल में बंद जगमोहन की जमानत के लिए प्रार्थना पत्र कोर्ट में पेश किया गया है। इस पर 23 जून को सुनवाई है। एसएसपी राजेश पांडेय ने प्रकरण की जांच रिपोर्ट मिलने पर कार्रवाई की बात कही है।