फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नोट खपाने का बड़ा ठिकाना है मीट इंडस्ट्री 

Mon, 25 Dec 2017 02:12 AM IST
अभिषेक शर्मा, अलीगढ़।
विज्ञापन
पड़ताल करती पुलिस। - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन
अपनी कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट/मैनेजर द्वारा चलाई गई गोली से जख्मी इकबाल शाह को खुद अंदाजा न था कि अनजाने में उसने बड़े राज से परदा उठा दिया। पुलिस व मीडिया से शुरुआती पूछताछ में उसने यह बोल दिया कि नोटबंदी के दौर में हसीन चौधरी द्वारा दिए गए करीब डेढ़ करोड़ रुपये की पुरानी करेंसी नए नोटों में बदलवाई थी। इसमें बतौर कमीशन पांच लाख रुपये आज तक न मिलना विवाद का कारण है। बाद में जब उसे लगा कि कुछ गलत बोल गया तो वह बातों में उलझाने की नाकाम कोशिश करने लगा। उसके पहले बयान से एक बार फिर यह साफ हो गया कि मीट इंडस्ट्री नोट खपाने का बड़ा ठिकाना है। यहां भारी मात्रा में नकली नोट भी खपाए जाते रहे हैं। पश्चिम बंगाल के रास्ते यहां नकली नोट भी आते रहे हैं। ऐसे में यह बड़ी जांच का सवाल है कि आखिर इतने नोट एक लेबर ठेकेदार ने किस स्तर पर किसकी मदद से बदलवाए होंगे?
विज्ञापन


इस तरह बदला इकबाल ने बयान
जब इकबाल को लगा कि वह कुछ गलत बोल गया तो उसने कहना शुरू किया कि उससे हसीन चौधरी कुछ नाराजगी रखते हैं। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने पहले उसके भाई मुजाहिद को कंपनी से निकलवा दिया और अब उसे निकलवाना चाहते हैं। कमीशन की पांच लाख की रकम के सवाल पर घुमाते हुए कहा कि कई तरह की देनदारियों का यह रुपया बकाया है। कुछ मजदूरों के मेहनताने का विवाद है।

वर्चस्व की जंग भी हो सकती है वजह
आम लोगों की बात करें तो यहां तालसपुर गांव के वह लोग जो पशु व्यापार से जुड़े हैं, उनमें वर्चस्व की ललक भी इस झगड़े की वजह है। पूर्व में जब भी यहां इस तरह के गोलीकांड हुए हैं, तब इस तरह की बातें सामने आई हैं। एक मर्तबा तालसपुर व हसनपुर गोंडा के लोगों में इसी बात पर गोलीबारी हुई थी। दोनों ने एक दूसरे के पक्ष के व्यक्ति को तत्काल मौत के घाट उतारकर बदला लिया था। जब माल देने और अपने लोगों को लेबर में लगवाने की मंशा पर पानी फिरता है तो इस तरह के विवाद सामने आते हैं। इस बार भी तालसपुर ग्रुप पर कुछ इसी तरह विवाद पैदा करने के आरोप चर्चाओं में हैं।
विज्ञापन


वेतन देने के लिए होनी थी बैठक
आज के इस हमले को लेकर यह बात उजागर हुई है कि वेतन को लेकर तीन माह से विवाद चल रहा है। करीब 60 कर्मचारी हड़ताल पर हैं। हड़ताल कराने के लिए इकबाल को जिम्मेदार माना जा रहा है। अल दुआ फैक्ट्री के मालिक कामिल चौधरी दिल्ली के रहने वाले हैं। उन्होंने अपने परिवार के ही हसीन को पूरा जिम्मा दे रखा है। हड़ताल खत्म कराने व वेतन देने के बहाने यह बैठक बुलाई गई थी।
विज्ञापन


यह भी जानें--
-2008-09 में जनपद के छर्रा कांड में बरामद हुए थे 40 लाख के नकली नोट
- मालदा से पकड़कर आए थे लियाकत दंपति, नकली नोट खपत पशु मार्केट में
- एटीएस ने कई बार में मालदा से आने वाली इन नोटों की आधा दर्जन खेपें पकड़ीं 
- आरोप है कि लियाकत दंपति अब भी अलीगढ़ जेल से चलाते हैं यह कारोबार
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें