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बदले की भावना से बना नक्सलियों का गैंग

Sun, 23 Oct 2016 01:10 AM IST
अमर उजाला,अलीगढ़
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कहानी बड़ी अजीब है, मगर हकीकत है। नक्सली दुनिया छोड़ चुके रंजीत उर्फ संतोष पासवान को 13 साल की उम्र में नक्सल ज्वाइन करने पर नौ साल की सजा हुई। सजा काटने के बाद जब वह बाहर आया तो सीधा नोएडा चला आया। यहां धंधा शुरू कर दिया। मगर धंधे में धोखा मिलने पर उसने फिर से अपराधियों को जोड़कर अपने कुछ पुराने नक्सली मित्रों को बुलाकर बदले की भावना से नक्सली गैंग खड़ा किया।
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मगर अपने मंसूबे में कामयाब होने से पहले ही यह गैंग दबोच लिया गया। हां, अगर गिरफ्तारी न होती और रोहतास में गिरफ्तार सिपाही लाल व धर्मवीर एके-47, कारबाइन जैसा बड़ा हथियार ले आते, तो शायद यह गैंग कोई बड़ा अपराध कर निकल जाता और इन पर किसी की नजर भी न जाती।

इस गैंग के मुख्य कर्ता धर्ता रंजीत पासवान उर्फ संतोष पासवान ग्राउंड चुटकला थाना इंडिया जनपद चंदोली के बैकग्राउंड से पता चला कि गरीबी के कारण वह पढ़ाई नहीं कर सका। 13 वर्ष की आयु में इसकी मुलाकात रमापति उर्फ  गुड्डू नाम के नक्सली से हुई और उसके प्रभाव में आकर नक्सली संगठन पीपुल्स वार ग्रुप से जुड़ गया और कैमूर एरिया का एरिया कमांडर नियुक्त हुआ।
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अपने संगठन के सदस्यों के साथ यह प्रमुख अभियानों में शामिल रहा। यूपी पुलिस ने उसको गिरफ्तार कर जेल भेजा और 9 साल सजा काटी। छूटकर आने के बाद वह पहले गुड़गांव गया, जहां पढ़ाई के साथ एक रीयल एस्टेट कंपनी में काम करते हुए एकाउंटेंट बना। बाद में नोएडा आकर अपनी कंपनी खड़ी की।

यहां उसकी मुलाकात पवन कुमार झा उर्फ  भाई जी निवासी रुद्रपुर थाना रुद्रपुर जनपद मधुबनी बिहार हाल निवासी हिंडन विहार सेक्टर 49 नोएडा से हुई। यह अपने मामा के घर पर रहा और 2012 में अपने मामा से झगड़ा होने पर दिल्ली आ गया। इसने यहां पर रहकर छोटी मोटी नौकरी की। फिर इसने अपने मित्र धीरज ठाकुर, अभिषेक  झा, बृजपाल और किशन रावत के साथ मिल कर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू कर दिया।

पवन को भी धंधे में  घाटा हुआ और ग्रेटर नोएडा के किसान रामनिवास गुर्जर से इसका विवाद हुआ। बदले के लिए यह भी घूम रहा था और रंजीत व पवन इसी बदले के लिए एक हो गए। इन लोगों ने आपराधिक लोगों से संबंध बना कर अपने दुश्मनों से बदला लेने की सोची। फिर बाबू, कृष्णा  कुमार, राम व सुनील आदि भी जुड़ गए।

कृष्णा रोहताश बिहार का रहने वाला है और वह कमांडर जीप चलाते चलाते नक्सलियों को इधर से उधर ले जाने लग था। बाद में यह पूर्ण रूप से पीपुल्स वार ग्रुप में शामिल हो गया। कृष्णा ने कैमूर के जंगलों में देशी हथियारों व बम बनाने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। वह सासाराम जेल भी गया। जेल से बाहर आने पर यह पवन झा के संपर्क में आया। पवन ने कृष्णा को अत्याधुनिक हथियार एकत्र करने तथा बम बनाने की सामग्री उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौंपी।

पवन के माध्यम से ही रोहताश में पकड़े गए सिपाही लाल व धर्मवीर इन्हें बड़े हथियार मुहैया कराने के लिए तैयार हुए और यहां से वह बिहार हथियार लेने गए। मगर दबोच लिए गए। जब नक्सलियों से हथियार मांगे गए तो वहां से ऑफर आया कि आप लोग नोएडा में अपराध कर धन कमाओ। हिस्सा हमें पहुंचाओ, हम हथियार देंगे। इसी दिशा में काम हो रहा था। मगर एटीएस को लीड मिल गई और दबोच लिए गए।
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