दिन भर अनशन पर बैठा परिवार देर रात हट गया और घर में चला गया। मगर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के माथे पर चिंता है कि सुबह क्या होगा। इसे लेकर देर रात तक अफसरान रणनीति बनाने में लगे रहे कि इलाके में अमन बना रहे और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी कैसे हो।
शासन स्तर से भी इस मामले में इशारा हुआ है कि किसी भी तरह मसला मैनेज किया जाए। बाकी 18 नवंबर को मुख्यमंत्री से परिवार की मुलाकात के बाद काफी कुछ तय हो ही जाएगा।
बृहस्पतिवार को हुए बवाल के बाद पुलिस प्रशासनिक स्तर पर मामला शुक्रवार को काफी हद तक मैनेज कर लिया गया। मगर शनिवार को कुछ उस समय चिंता बढ़ गई, जब परिवार ने अनशन की बात कह दी। हालांकि देर रात परिजन अनशन से हट गए और सड़क से उठकर घर में चले गए। मगर अभी चिंता सुबह होने पर भी है।
इसे लेकर देर रात तक अधिकारी मंथन में जुटे रहे। इसके अलावा नामजदों की गिरफ्तारी, शहर में फोर्स की तैनाती, मामले में भाजपा के सांसदों की एंट्री के बाद इसे मैनेज करने जैसे मुद्दों पर देर रात तक प्रशासनिक स्तर पर रणनीति बनती रही।
इसके लिए उन खुराफातियों को भी रडार पर लिया जा रहा है जो लोगों को भड़काने या उकसाने जैसे काम करते हैं। कुल मिलाकर अधिकारी इसलिए भी मामला मैनेज करने में जुटे हैं कि जब खुद मुख्यमंत्री स्तर से 18 नवंबर का समय दिया गया है तो फिर मुद्दे को राजनीति तूल देने से पहले क्यों न रोका जाए।