महानगर के सराय मियां-कैलाश गली के मुहाने पर बृहस्पतिवार रात जो कुछ हुआ। उसके प्रत्यक्षदर्शी गवाहों की जुबानी अगर कहानी सुनें तो उपद्रवियों की साजिश बेहद खतरनाक थी। जिस गोली से गौरव की जान गई। वह गोली दरअसल गौरव के लिए नहीं, बल्कि उपद्रवियों को रोकने की कोशिश कर रहे एसओ देहली गेट विनोद यादव के लिए चली। मगर लग गौरव के गई।
प्रत्यदर्शियों के अनुसार इलाके का एक पेशेवर अपराधी एक हाथ में स्टूल लेकर अपना चेहरा छिपाए हुए दूसरे हाथ से गोली चला रहा था। उसने सीधे एसओ को निशाना बनाकर गोली चलाई। मगर आभास होने पर एसओ ने झुककर खुद को बचाया और गोली पीछे खड़े गौरव की जांघ में जा लगी।
इससे पहले उपद्रवियों ने सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले लैपर्डकर्मी की बाइक को फूंक दिया था। जब कई मर्तबा पुलिस को दौड़ाया तो एक बार एडीएम सिटी अकेले रह गए और उन्हें एक कमरे में बंद कर लिया गया। बाद में कुछ लोग उन्हें निकालकर लाए। इससे साफ जाहिर है कि उपद्रवियों की साजिश शहर के अमन को पलीता लगाने की थी। शुरुआत में पुलिस की कमी और बाद में अन्य पुलिस बल के देरी से आने पर वह काफी हद तक सफल भी हुए।
मगर फिर जो पुलिस ने उन्हें फायरिंग व लाठीचार्ज कर खदेड़ा, तो उनके मंसूबों पर पानी फिर गया। जब एसओ विनोद यादव से इस संबंध में पूछा गया तो खुद पर गोली चलने के सवाल को टालते हुए वह चुप्पी साध गए। मगर तमाम पुलिसकर्मियों व प्रत्यक्षदर्शी पब्लिक के लोगों ने इस बात की गवाही दी है।