जेल में बंदी से मुलाकात के लिए आपको अपनी आईडी लेकर जानी होगी। जेल के गेट पर कंप्यूटर काउंटर पर फोटो खिंचाना होगा और थंब इंप्रेशन देना होगा। इसके बाद ही आपकी मुलाकात कराई जाएगी। अन्य जेलों की तरह यहां भी डाटाबेस मुलाकात सिस्टम शुरू करा दिया गया है।
ट्रायल के तौर पर रविवार को पहले दिन 70 फीसदी मुलाकात इसी सिस्टम के तहत कराई गई। इस सिस्टम के शुरू होने से मुलाकात में होने वाले फर्जीवाड़े पर अंकुश लगने की बात कही जा रही है।
यहां जिला कारागार में अब तक मुलाकात पर्ची सिस्टम से होती थी। कोई भी फोन करके या सामने आकर बाहर फर्ची ठेकेदार से पर्ची लगवा देता था। ठेकेदार सिर्फ पर्ची लगवाने वाले का नाम, बंदी का नाम और रिश्ता पूछता था। इसके सिवाय कोई जानकारी नहीं ली जाती थी।
अब ऐसे में श्यामलाल अपना नाम रामलाल बताकर अगर किसी बंदी से मिल रहा है तो कोई सत्यापन करने वाला नहीं है। अक्सर इसी फर्जीवाड़े से संगीन मामलों में निरुद्ध अपराधी से भी यहां अपराधी मुलाकात कर चले जाते थे। इस फर्जीवाड़े पर अंकुश के लिए डाटाबेस मुलाकात सिस्टम शुरू कराने पर काफी समय से जोर चल रहा था।
वरिष्ठ अधीक्षक डॉ. वीरेश राज के अनुसार कई दिन से चल रही प्रक्रिया को रविवार को मूर्त रूप दिया गया। रविवार से शुरू हुए इस सिस्टम के तहत 70 फीसदी लोगों की मुलाकात कराई गई। इस सिस्टम के तहत मुलाकाती का डाटा कंप्यूटर में कैद किया जा रहा है। इसके बाद एक कंप्यूटरीकृत पर्ची अंदर जाएगी।
इसी पर्ची के आधार पर मुलाकाती की मुलाकात अंदर बंदी से कराई जाएगी। कंप्यूटरीकृत पर्ची में भी कोई बदलाव का अंदेशा नहीं रहेगा। अधीक्षक के अनुसार यह ट्रायल सिस्टम सात दिन तक चलेगा। इसके बाद अगले रविवार से शत-प्रतिशत मुलाकात इसी सिस्टम से शुरू करा दी जाएगी।