अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का परचम लहराने वाले पालेंद्र को एथलीट बनने की प्रेरणा उनके पिता से मिली थी। उनके पिता भी कबड्डी के खिलाड़ी थे। लगसमा खेल समिति की ओर से आयोजित प्रतियोगिताओं में खेल चुके हैं।
पालेंद्र के पिता महेशपाल कबड्डी खेलते थे। बचपन से ही पालेंद्र उनके खेल के प्रति रुचि को देखता आ रहा था। वह अपने पिता से ही प्रेरित हुआ था। खेल के प्रति पालेंद्र का पिता का सम्मान और जीत के बाद मिलने वाली खुशी को देखते हुए वह बड़ा हुआ। पालेंद्र ने कई बार अपने दोस्तों से भी इसका जिक्र किया था। पालेंद्र ने अपने स्थानीय कोच विवेक को भी इसका श्रेय दिया था।
पालेंद्र ने अपनी हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद खेल संगठनों की मदद से डीपीएस में दाखिला लिया। इसमें भी उनके पिता की एक अहम भूमिका रही। पिता ने हर वक्त साए की तरह रहकर बेटे का मनोबल बढ़ाया। जब पालेंद्र छोटा था तो उसके पिता गांव में ही एक घड़ी की दुकान चलाया करते थे। जो भी कमाते थे ज्यादातर पालेंद्र के लालन-पालन में ही खर्च कर देते थे।
कई बार उसकी जरूरतों के चलते पिता ने कर्ज तक ले लिया था। पालेंद्र के कोच विवेक कुमार ने बताया कि पालेंद्र के पिता ने कभी भी उसे किसी चीज की कमी नहीं होने दी। पालेंद्र के पिता भी गांव की कबड्डी टीम में थे। उन्होंने भी कई प्रतियोगिताओं में भाग लिया और जीते भी। हालांकि जिम्मेदारियों के चलते वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं जा पाए।
पालेंद्र ने सवा लाख का पुरस्कार जीत उतारा था डीपीएस का कर्ज
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश और जिले का नाम रोशन करने वाले एथलीट पालेंद्र को दसवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद डीपीएस ने अपने हॉस्टल में जगह दी थी। डीपीएस की ओर से उसकी पढ़ाई के साथ ही उसका स्पोर्ट्स करियर का खर्चा भी उठाया जा रहा था। लेकिन, पालेंद्र ने भी डीपीएस के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। उनकी नेशनल इंटर स्कूल प्रतियोगिता में 1.25 लाख की इनाम राशि और ट्रॉफी जीत कर डीपीएस का कर्ज उतारा था। पालेंद्र ने अपनी प्राथमिक पढ़ाई इगलास के गांव कैमथल में पूरी की थी। दसवीं करने के साथ ही उसने प्रदेश स्तर पर खेलना शुरू कर दिया था। 2014 में उसने बनारस में सबसे पहली प्रतियोगिता में भाग लिया था। वहां लंबी कूद में उसने गोल्ड जीता था। इसके बाद पालेंद्र डीपीएस में आ गए। यहां हॉस्टल और पढ़ाई की अच्छी व्यवस्था थी। यहां रहकर उन्होंने प्रतियोगिताओं की तैयारी करना शुरू किया। एक कार्यक्रम में उसने डीपीएस को अपना दूसरा माता-पिता भी कहा था। वर्ष 2017 में उसने डीपीएस की नेशनल इंटर स्कूल प्रतियोगिता में परचम लहराते हुए 1.25 लाख का पुरस्कार जीता था। पालेंद्र के स्थानीय कोच विवेक कुमार ने बताया कि उसका टारगेट ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड लाना था। वह कहता था कि उसे भारत की जर्सी पहननी है। नौकरी के बारे में उसका कोई इरादा नहीं था, परिवार की परिस्थितियों को देखते हुए वह नौकरी करने को तैयार हुआ था।