सासनी गेट बीबी की सराय का फर्जी पता बताकर नशे के उत्पाद की तस्करी करने वाले पाकिस्तानी नागरिक को कानूनी मदद के लिए दिल्ली स्थित तिहाड़ जेल शिफ्ट कर दिया गया। जहां उसकी 31 अगस्त को पाकिस्तानी दूतावास के काउंसलरों ने काउंसलिंग की। साथ ही उसके मुकदमों से जुड़ी तमाम जानकारियां हासिल कीं। अभी उसे तिहाड़ जेल में ही रोका गया है। बता दें कि उस पर भारत में नशा उत्पाद की तस्करी के तीन मुकदमे हैं, जिनमें से एक का ट्रायल अभी अलीगढ़ न्यायालय में चल रहा है।
पाकिस्तान, कराची के गांधी रोड निवासी इकबाल पुत्र अब्दुल सत्तार अलीगढ़ जेल में निरुद्ध था। उस पर ऊपरकोट कोतवाली से संबंधित नशा उत्पाद की तस्करी के मुकदमे का ट्रायल चल रहा है। जब उसके पाकिस्तानी होने और इस देश में उसका कोई पारिवारिक सदस्य न होने का खुलासा हुआ तो नियमानुसार कारागार प्रशासन ने पाकिस्तानी दूतावास को सूचना भेजी।
दूतावास ने उसका पाकिस्तान से पता सत्यापित कराते हुए उसे कानूनी मदद देना तय किया। इसी प्रक्रिया के तहत उसे तिहाड़ जेल बुलाया गया, जहां 31 अगस्त को दूतावास की काउंसलर कमेटी के समक्ष पेश किया गया। वहां उसकी काउंसलिंग की प्रक्रिया तो पूरी हो गई है। अब कानूनी औपचारिकताओं व अधिवक्ता मुहैया कराने की कार्यवाही शेष रह गई है। इसके बाद उसे वापस अलीगढ़ जेल शिफ्ट कर दिया जाएगा।
चोरी का आरोपी अफगानी नागरिक वापस पंजाब शिफ्ट
अलीगढ़। ट्रेनों में चोरी करने के आरोपी अफगानी नागरिक को वापस पंजाब पठानकोट जेल शिफ्ट कर दिया गया है। बता दें कि नजोकमीर पुत्र वली मोहम्मद निवासी दरवाजेवाला माई माई जरायक बदार बसान अफगानिस्तान को जीआरपी पठानकोट से संबंधित चोरी, माल बरामदगी, पासपोर्ट नियम उल्लंघन आदि के मुकदमे में पठानकोट कोर्ट ने छह महीने की सजा सुनाई थी। उस पर वर्ष 2016 में अलीगढ़ जीआरपी में भी चोरी का मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे में अदालत ने उसे पठानकोट से तलब किया था। यहां करीब एक पखवाड़ा रहने और अदालती प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे पठानकोट जेल शिफ्ट कर दिया गया है।
फर्जी पते का फ्लैशबैक
उत्तराखंड के मुक्तेश्वर में इकबाल पकड़ा गया। जहां उसने अपना पता बीबी की सराय सासनी गेट अलीगढ़ बताया और कहा कि 2007 में उसे कोतवाली ऊपरकोट पुलिस ने भी तस्करी में जेल भेजा था। इसके बाद यहां 2010 में फिर कोतवाली से गिरफ्तारी हुई। इस बार जब जेल गया तो मुक्तेश्वर की अदालत ने उसे अपने यहां के मुकदमे में तलब कर 10 साल की सजा व 1 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया और 2010 के अलीगढ़ के मुकदमे में भी उसे 5 साल की सजा सुना दी गई। अब चूंकि 2007 का अलीगढ़ का मुकदमा अदालत में लंबित था तो यहां की अदालत की तलबी पर उसे मुक्तेश्वर से पिछले माह यहां शिफ्ट कर दिया गया। इसी अदालती प्रक्रिया में उसके पते के सत्यापन में स्थानीय लोगों ने भेद खोला कि वह मूल रूप से पाकिस्तान का है। बाद में एलआईयू जांच में यह बात सच साबित हुई। पता चला कि तस्करी करते-करते वह भारत आ गया।
इकबाल को पाक दूतावास ने काउंसलिंग व कानूनी मदद के लिए 31 अगस्त को कमेटी के समक्ष तलब किया था। इसी प्रक्रिया के तहत उसे यहां से तिहाड़ जेल भेजा गया। औपचारिकताओं के बाद उसे वापस अलीगढ़ लाया जाएगा। - आलोक सिंह, वरिष्ठ अधीक्षक कारागार