पुलिस ने आधी रात को मुठभेड़ के बाद हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार कर लिया। बदमाश के पैर में गोली लगी है और पुलिस की हिरासत में मेडिकल में भर्ती कराया गया है। हिस्ट्रीशीटर के दो साथी फरार होने में कामयाब हो गए।
अखिलेश उर्फ शिवा निवासी जवां अलीगढ़ पेशेवर लुटेरा और डकैत है। शिवा पर अलीगढ़, हाथरस, बुलंदशहर समेत आसपास के जिलों में 55 से 60 मुकदमे दर्ज हैं। कुछ महीने पहले ही शिवा जेल से छूटा है। तीन दिन पहले बाईपास रोड पर मैलरोज के पास दो युवक बाइक समेत खड़े थे। पुलिस की गश्ती जीप ने युवकों को टोका, तो ये पुलिस पर फायरिंग करते हुए फरार हो गए थे। पुलिस ने उनमें से एक युवक को शिवा के रूप में चिह्नित किया था। तभी से उसकी तलाश में टीमें लगा दी गई थीं।
गुरुवार आधी रात को पुलिस को सूचना मिली कि शिवा अपने दो साथियों के साथ जवा क्षेत्र के अनूपशहर रोड पर छेरत सीडीएफ के पास खड़ा है। यहां से तीनों बदमाशों को नगला पटवारी स्थित रियाज कालोनी और उसके आसपास कहीं डकैती डालनी थी। मुखबिर से इसकी भनक पुलिस को लगी। एसओ जवा, एसओजी और क्राइम ब्रांच ने इलाके की घेराबंदी कर ली थी। देर रात एक बजे पुलिस ने तीनों बदमाशों को देखते ही ललकारा, तो उन्होंने फायरिंग कर दी। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की। एक गोली शिवा के पैर में लगी और वह वहीं गिर गया। जबकि उसके दो साथी भाग गए।
ऐसे करते थे अपराध
शिवा का एक साथी विक्रम है, जो इसका सगा भांजा है। विक्रम बुलंदशहर के पिलखवा का रहने वाला है। इनके साथ शिवा का भाई भी गैंग में शामिल है। ये तीनों लोग मिलकर खासतौर से रैकी के बाद डकैती को अंजाम देते थे। 2010 में शहर मेें बन्ना देवी के पास डकैती की वारदात हुई थी। जून 2010 में 20 हजार के इनामी शिवा को पुलिस ने मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। भागते समय उसका पैर टूट गया था। दो साल जेल में रहने के बाद बाहर आ गया। इसके बाद वह सासनी गेट में रहकर अपराध को अंजाम देने लगा। 2016 में पुलिस ने शिवा को नशीले पदार्थ के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस की इस कार्रवाई में सीओ थर्ड राजीव सिंह, एसओ जवा अमित यादव, एसओजी प्रभारी छोटे लाल, क्राइम ब्रांच प्रभारी राकेश यादव, एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव पुलिस टीम के साथ शामिल रहे।