महानगर में 2006 में हुए सांप्रदायिक दंगे के दौरान हुई हत्याओं में जारी गैरजमानती वारंट (एनवीडब्ल्यू) में प्रमुख व्यापारी नेता व कारोबारी हरिकिशन अग्रवाल को शनिवार रात उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया।
अब आकर पुलिस द्वारा एकाएक इस तरह गिरफ्तारी की खबर पर रविवार दोपहर मानव महाजन सहित तमाम भाजपाई व व्यापारी नेता सासनी गेट थाने पहुंच गए। वहां इस बात पर ऐतराज जताया कि अब आकर ही क्यों यह गिरफ्तारी हुई, जबकि वारंट काफी समय से चल रहे थे। मगर तब तक देर हो चुकी थी। पुलिस गिरफ्तारी लिखापढ़ी की कार्रवाई पूरी कर चुकी थी।
बाद में एसओ ने समझाकर जानकारी दी तो यह लोग कारोबारी से मिलकर वापस चले आए। इधर, पुलिस ने हरिकिशन अग्रवाल को जेल भेज दिया। महानगर के अतिसंवेदनशील दही वाली गली स्थित देवी मंदिर पर पांच अप्रैल 2006 को दुर्गा अष्टमी की शाम पूजापाठ को लेकर दो समुदायों में पथराव-फायरिंग हुई थी।
इसके अगले दिन छह अप्रैल को सांप्रदायिक दंगा भड़क गया था। पुराने शहर के कई इलाकों में आगजनी, लूटपाट और फायरिंग हुई थी। कनवरी गंज फर्श पर सर्वाधिक उपद्रव हुआ था। फायरिंग में चार युवक सादाब, नवेद, आजम और सरफराज की मौत हुई और अनगिनत लोग घायल हुए थे।
इन चारों की हत्या में मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें ओपी लाला, शकुंतला भारती, कैलाश, आनंद फाइनेंसर, सुरेश आदि नामजद किए गए थे। एसपी सिटी के गनर प्रेमचंद ने अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा व एके-47 की मैगजीन मय कारतूस लूट का मामला दर्ज कराया। पुलिस अभिलेखों के अनुसार गनर से हुई लूट के मामले में पकड़े गए नरेंद्र ने दंगे में शामिल लोगों के नामों का खुलासा किया था, जिसमें अमित, आलोक फाइनेंसर और मानिक चौक के गुनी उर्फ गुनेश के नाम प्रकाश में आए थे।
इस मामले में सीबीसीआईडी जांच के बाद आरोपियों पर चार्जशीट दाखिल हुई। चार्जशीट पर अदालत ने वारंट जारी कर दिए। एसओ सासनीगेट विनोद कुमार में बताया कि दंगे के दौरान हुई हत्या के मामले में तमोली पाड़ा रफातगंज के हरी किशन अग्रवाल भी आरोपी हैं। तभी से उनके वारंट चल रहे थे। शनिवार रात पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर अगले दिन जेल भेज दिया। इधर, बाकी लोगों के विषय में बताया गया है कि अदालत में मजबूत पैरवी व हाईकोर्ट से अपने पक्ष में आदेश लाने के कारण बच गए।