महानगर की बन्नादेवी थाना पुलिस ने एटीएम से नए तरह का फ्राड करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इन दोनों ने यू-ट्यूब से एटीएम फ्राड का वीडियो देखकर यह तरीका इजाद किया और अलीगढ़, हाथरस, मैनपुरी, एटा सहित कई शहरों में अनगिनत वारदातों को अंजाम देकर रुपये पार कर दिए। इन दोनों को एक वारदात में सीसीटीवी में कैद होने के बाद पहचान लिया गया और दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। इनसे अभी अन्य वारदातों को लेकर पूछताछ चल रही है। साथ ही अब तक की गई वारदातों को लेकर एटीएम रिकार्ड खंगाले जा रहे हैं।
मसूदाबाद बस स्टैंड के एटीएम में कैद हुए
एसपी सिटी अतुल श्रीवास्तव के अनुसार बन्नादेवी के मसूदाबाद बस स्टैंड स्थित टाटा इंडीकेश एटीएम से 5 अगस्त की शाम 8 बजे छेड़छाड़ हुई थी। इस दौरान 19500 रुपये निकाले गए, जिसकी सूचना टाटा कम्युनिकेशन के एटीएम ऑफिसर सत्यवीर सिंह ने थाने पर दी। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच करते हुए एटीएम केबिन के सीसीटीवी फुटेज निकाले और दो लोग उसमें कैद पाए गए। इसी आधार पर पुलिस ने इन दोनों को बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों ने अपनी नाम पहचान बताते हुए एटीएम फ्राड करना स्वीकारा। दोनों ने अपने नाम सुनील पुत्र महीपाल सिंह निवासी देव पनाखर सिकंदराराऊ हाथरस, सूरवीर पुत्र राकेश निवासी नगला देशी कुरावली मैनपुरी बताया और दोनों के कब्जे से एक मास्टर चाभी, 12 एटीएम कार्ड, 5560 रुपये नगद बरामद हुए।
मास्टर चाभी से बंद करते हंै मशीन
एसपी सिटी के अनुसार पूछताछ में दोनों ने स्वीकारा है कि वह अपने पास अपने परिचितों, करीबियों और परिजनों के काफी संख्या में एटीएम कार्ड रखते हैं। साथ ही एक मास्टर चाभी भी रहते हैं। इसके बाद एकांत के एटीएम केबिन में जाकर उसमें अपना कार्ड फंसाकर रुपये निकालते हैं और मास्टर चाभी से केबिनेट का ऊपरी हिस्सा खोल लेते हैं। रुपये निकलते ही पर्ची निकलने से पहले एटीएम केबिनेट में हाथ डालकर उसे 5 मिनट के लिए स्विच ऑफ (मशीन बंद) कर देते हैं। ऐसा करने से मशीन से हुए ट्रांजक्शन (रुपये निकासी) का डाटा मशीन में फीड नहीं होगा। इसके बाद अगले दिन यह लोग संबंधित बैंक में जाकर एक आवेदन देते हैं कि हमने आपके एटीएम से रुपये निकालने के लिए प्रयास किया। मगर रुपये नहीं निकले और हमारे खाते से रकम कट गई। इसकी बैंक से जांच होती है, जिसमें उनका आवेदन सही माना जाता है और 7 दिन में इन लोगों को खाते से कटी हुई रकम खाते में वापस मिल जाती है।
एटीएम की मास्टर चाबी कहां से आई?
पुलिस की गिरफ्त में आए सुनील और सूर्यवीर ने कहा है कि उनके पास एटीएम की मास्टर की होती थी, जिसकी मदद से वह फ्राड को आसानी से अंजाम देते थे। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि उनके पास एटीएम की मास्टर की कहां से आई..? क्योंकि मास्टर की उनके पास होना कई बड़े सवाल पैदा करती है। ताला कारोबारी पवन खंडेलवाल कहते हैं कि आमतौर पर आर्डर देने पर ही ऐसे तालों का सेट बनता है, जिसकी एक मास्टर की बनती है। जिससे सभी ताले खुल जाते हैं। मसलन.. अगर किसी कंपनी ने आर्डर देकर पचास तालों का सेट बनवाया है और उसको पूरे सेट की एक मास्टर की चाहिए, जिससे सभी पचास ताले खुल जाएं तो ऐसे तालों का एक कंबीनेशन सेट बनता है। ये सेट पहले मास्टर की से चला कर देखा जाएगा और उसके बाद हरेक ताले में कुछ खास परिवर्तन कर उसकी अलग अलग चाबियां भी बना दी जाएंगी। गौर हो कि किसी भी ताले में पहले चाबी बनती है और उसके बाद ही ताला बनता है। एक अन्य ताला कारोबारी कहते हैं कि बैंक के लॉकरों में इसी तरह का ताले का सेट इस्तेमाल होता है। जिसमें बैंकर के पास एक मास्टर की होती है, जिससे वह सभी लॉकर के ताला सेटों को खोल और बंद कर देता है जबकि इसी सेट की अलग-अलग चाबियां ग्राहकाें के पास होती है। जिससे वह अपने बैंक लॉकर खोलते या बंद करते हैं। जरूरत पर ग्राहक अपना ताला भी अलग से लगा देते हैं। अब एटीएम की मास्टर की उसके तकनीकी जानकार या एटीएम दुरुस्त करवाने वाले अफसर के पास हो सकती है या उसके पास जो एटीएम में पैसा भरते हैं। ऐसे में चाबी फ्राड करने वालों के पास कैसे पहुंच गई ये बड़ा सवाल है..?
यू-ट्यूब देख कई साल से चल रहा धंधा
दोनों ने स्वीकारा है कि कुछ साल पहले उन्होंने यू-ट्यूब पर एटीएम फ्राड संबंधित ऐसा एक वीडियो देखा था, इसके बाद उनके दिमाग में भी इस खुराफात का विचार आया और दोनों ने अब तक अनगिनत एटीएम से इस तरह से फ्राड किया है। एसपी सिटी के अनुसार इस मामले में दोनों पर मुकदमा दर्ज कर उनके द्वारा अब तक बताए जा रहे फ्राड का सीसीटीवी आदि की मदद से डाटा तैयार किया जा रहा है। उनके द्वारा इस फ्राड से चुराई गई रकम कई लाख बताई जा रही है। इस गिरफ्तारी में इंस्पेक्टर जितेंद्र दीक्षित व उनकी टीम शामिल रही है।