देवबंद से जैश से जुड़े दो आंतिकयों से पूछताछ में संगठन के एरिया कमांडर के अलीगढ़ घूमने की खबर सामने आई है। इस खबर ने एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। उनकी पहली प्राथमिकता यह जानने में है कि एरिया कमांडर किन किन लोगों से मिला? खुफिया एजेंसियों को शक है कि एरिया कमांडर ने अलीगढ़ में जैश का स्लीपिंग माड्यूल तैयार कर दिया है। एजेंसियों के हरकत में आने की दूसरी वजह यह भी है कि भोपाल जेल में बंद आईएम से जुड़े सफदर नागौरी को जमानत मिल गई है। उसका भी अलीगढ़ से पुराना नाता रहा है। उसे लेकर भी एजेंसियां अलीगढ़ में टोह ले रही हैं।
देश में कहीं भी कोई आतंकी घटना होती है तो उसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अलीगढ़ से कई न कोई कनेक्शन निकल आता है। इसकी एक वजह यह है कि यहां विगत में विभिन्न समय में आतंकी संगठनों और उससे जुड़ाव की घटनाएं सामने आई हैं। सन 1974 में प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी की स्थापना के बाद अलीगढ़ हमेशा खुफिया एजेंसियों के रडार पर रहा। इसके अलावा पांच साल पहले भोपाल से आईएम (इंडियन मुजाहिद्दीन) का आतंकी सफदर नागौरी पकड़ा गया, जिसने बताया कि वह अलीगढ़ में कुछ समय रहकर आया।
1991 के आसपास दोदपुर से एक कश्मीरी शाल की गांठ में एके 47 राइफल पकड़ी गई थी। उसका एक आरोपी आज तक फरार है। कुछ समय पहले हिजबुल आतंकी मन्नान वानी का मामला सामने आया। ताजा हालात में अब खुफिया ऐजेंसियां जैश के एरिया कमांडर और सफदर नागौरी के स्थानीय मिलने-जुलने वालों की तलाश में लगी हैं। इसके लिए स्थानीय खुफिया तंत्र की भी मदद ली जा रही है। एरिया कमांडर के यहां पर घूम जाने की खबर से खुफिया एजेंसियों को शक है कि अलीगढ़ में आतंकियों ने अपने लिए कई स्लीपर माड्यूल न तैयार कर लिया हो। अभी एजेंसियों के रडार पर कई बिंदु हैं जिनको सुरक्षा कारणों से हम यहां पर उल्लेख नहीं कर रहे हैं।