अलीगढ़। महानगर में चिटफंड कंपनी चलाकर गबन के मामले में एक युवती के जिंदा या मुर्दा होने को लेकर पैदा हुए साक्ष्यों ने सभी को उलझाकर रख दिया है। एक तरफ युवती की मां ने साक्ष्य पेश किया है कि युवती इस गबन कांड से पहले ही मर चुकी है। वहीं पुलिस पहले युवती को मृत मान रही थी। मगर अब कहा है कि मृत युवती जीवित है और नाम बदलकर शहर में ही रह रही है। इसे लेकर अदालत ने अब याची पक्ष से स्थिति स्पष्ट करने के लिए कहा है।अदालत में दायर वाद के अनुसार वाकया 2009 से शुरू हुआ। महानगर के साकेत विहार सासनी गेट की नेहा अग्रवाल पुत्री अनिल अग्रवाल नाम की युवती ने अपने घर में किराये पर रहने वाले दिनेश, उनकी पत्नी व बेटे के साथ मिलकर एक चिट फंड कंपनी शुरू की। याची अनुराग निवासी हरी नगर के अनुसार कंपनी के नियम के अनुसार तीन साल में रकम दोगुनी करने का लालच दिया। उन्होंने 3.50 लाख रुपये दिए और तीन साल बाद जब रकम मांगना शुरू किया तो सभी गायब हो गए। इसके बाद 2012 में एसीजेएम चतुर्थ के न्यायालय में वाद दायर किया। इस पर चारों को तलब किया तो नेहा अग्रवाल की ओर से सत्र न्यायालय में रिवीजन दायर किया, जिसे बाद में खारिज कर दिया गया।रिवीजन खारिज होने पर फिर से चारों के खिलाफ समन जारी हुए तो नेहा नहीं आई। बाद में पुलिस को अदालत ने पत्र लिखे तो पुलिस की ओर से पहली बार में सूचना आई कि घर पर कोई नहीं मिला। दूसरी बार में नेहा की मृत्यु की सूचना दी गई। तीसरी बार में सूचना दी गई कि नेहा उर्फ मेघा एक ही युवती हैं। नाम बदलकर मेघा ने जनवरी 2015 में शादी कर ली है। इसके बाद लगातार समन जाने पर नेहा की मां ने अदालत में पेश होकर वर्ष 2008 का नगर निगम से जारी मृत्यु प्रमाण पत्र पेश किया, जिसके हवाले से बताया कि नेहा की मृत्यु तो 15 जून 2003 को हो चुकी है। यह देख अदालत दंग रह गई। मगर पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में दिया है कि महिला के एक ही बेटी है। जो अब नाम बदलकर शादी करके शहर में ही रह रही है। इस पर अदालत ने 26 फरवरी को दिए आदेश दिए हैं कि याची पक्ष हकीकत के साक्ष्य पेश करे।