क्राइम डेस्क, अमर उजाला, अलीगढ़।
बन्ना देवी के नगला कलार में मासूम दलित लड़की से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या के मामले में अब तक पुलिस सभी गवाहों को पेश नहीं कर पाई है। जिससे इस पांच साल बाद भी इस मामले में पीड़ित पक्ष को इंसाफ का इंतजार है। 17 अप्रैल 2013 बन्ना देवी के नगला कलार में एक मासूम दलित बच्ची की रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई थी। जिसके बाद स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन कर दिया। परेशान पुलिस ने महिलाओं पर लाठीचार्ज कर दिया। जिसमें तत्कालीन सीओ एके सिंह निलंबित कर दिए गए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया। इस मामले में तीसरे दिन दुष्कर्म और हत्यारोपी सुमन उर्फ सोमना खैर कस्बा में पब्लिक की मदद से पकड़ा गया था, जब सुबह सुबह उसने अपने हाथ की नस काट कर जान देने की कोशिश की थी। सुमन ने अस्पताल में बयान दिया था कि दुष्कर्म और हत्या करने के बाद उसे आत्मग्लानि हुई, इसलिए उसने खुद जान देना चाही थी। सरकारी अस्पताल में उपचार के बाद उसे वरूण ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था। ठीक होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। आरोपी सुमन आरोपी जेल में है।
इस प्रकरण में तीन मुकदमे दर्ज हुए। पहला दुष्कर्म और हत्या, दूसरा पुलिस ने 222 बलवाइयों के खिलाफ शांति भंग करने, उपद्रव करने का मामला दर्ज कराया, वहीं पुलिस अधिकारियों के खिलाफ 156/ 3 में लाठीचार्ज करने का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस दो मुकदमे खत्म हो गए। लेकिन दुष्कर्म और हत्या का मुकदमा वर्ष 2013 से चल रहा है।
इसमें कुल 19 में 11वें गवाह के रूप में वरूण ट्रामा सेंटर के संचालक डा. संजय भार्गव मंगलवार को गवाही देने अदालत पहुंचे। क्योंकि डा. संजय भार्गव ने ही सुमन की जान बचाई थी। दलित मासूम बेटी के पक्ष के एडवोकेट वीरपाल जादौन ने कहा कि सुनवाई अंतिम चरण में है। एक गवाह और रह गया है। पांच साल बाद भी गवाही पूरी नहीं हुई। वो भी तब जब ये मामला जिले के चर्चित कांड में शुमार है, जिसकी निगरानी राज्य स्तर पर हो रही है।